केंद्र सरकार की 'डेमोग्राफी चेंज' समिति का किया स्वागत, राहुल गांधी के रुख से अलग दिख रही राय
India News Live,Digital Desk : कांग्रेस के भीतर एक बार फिर वैचारिक भिन्नता के संकेत देखने को मिल रहे हैं। जहां एक ओर पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी केंद्र सरकार की नीतियों पर लगातार कड़े हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के एक बड़े फैसले का खुलकर समर्थन किया है। गृहमंत्री अमित शाह द्वारा देश में हो रहे 'अस्वाभाविक जन सांख्यिकीय परिवर्तन' (Demographic Change) की जांच के लिए गठित की गई हाई-प्रोफाइल समिति का थरूर ने स्वागत किया है।
थरूर ने फैसले को बताया महत्वपूर्ण
न्यूज 18 से बातचीत करते हुए शशि थरूर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लिया गया यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि देश में कई तरह के बदलाव हो रहे हैं और यह समझना जरूरी है कि हम किन जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से गुजर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी सावधानी बरती कि इस फैसले के राजनीतिक प्रभावों पर भी चर्चा होनी चाहिए। थरूर ने एक महत्वपूर्ण चिंता जाहिर करते हुए कहा कि, "समिति को सटीक और विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध कराने होंगे। यदि आंकड़े अधूरे रहे या उनके चयन में पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो इसके दुरुपयोग की आशंका बनी रहेगी और विवाद खड़ा हो सकता है।"
क्या है सरकार की यह 'डेमोग्राफी समिति'?
गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में इस समिति के गठन की आधिकारिक घोषणा की थी। सरकार का मानना है कि घुसपैठ और अन्य कारणों से होने वाला अस्वाभाविक जन सांख्यिकीय परिवर्तन देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2025 को इसके लिए एक विशेष समिति बनाने का वादा किया था।
समिति की संरचना:
अध्यक्ष: जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर (सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश)
सदस्य: दुर्गा शंकर मिश्रा (पूर्व IAS), बालाजी श्रीवास्तव (पूर्व IPS), शामिका रवि (अर्थशास्त्री) और जनगणना आयुक्त।
भाजपा का एजेंडा और राजनीतिक मायने
भारतीय जनता पार्टी काफी समय से सीमावर्ती राज्यों में जनसंख्या परिवर्तन के मुद्दे को प्रमुखता से उठाती रही है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा बार-बार दावा करते रहे हैं कि अवैध घुसपैठ के कारण असमिया मूल के लोग अपने ही राज्य में अल्पसंख्यक होने की स्थिति में आ गए हैं। भाजपा ने पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल में अपनी चुनावी रणनीति के केंद्र में इसी मुद्दे को रखा है। थरूर का इस मुद्दे पर सरकार के समर्थन में खड़ा होना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि पार्टी के आधिकारिक रुख और थरूर के बयानों में अक्सर अंतर देखा जाता है।