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July 09 2026 11:25 pm

पर्सनैलिटी राइट्स केस में दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, सोशल मीडिया कंपनियों को समन जारी

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भारतीय क्रिकेट टीम के उभरते हुए स्टार ऑलराउंडर अभिषेक शर्मा (Abhishek Sharma) के 'पर्सनैलिटी राइट्स' (Personality Rights Case) के उल्लंघन से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने क्रिकेटर के नाम, फोटो और उनकी पहचान का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना अनुमति के गलत इस्तेमाल करने वाले प्रतिवादियों (डिफेंडेंट्स) के खिलाफ आधिकारिक तौर पर समन और नोटिस जारी कर दिया है। दिल्ली हाई कोर्ट की माननीय जस्टिस ज्योति सिंह ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी संबंधित सोशल मीडिया हैंडल्स और अन्य कानूनी तौर पर मान्य तरीकों से प्रतिवादियों को नोटिस सर्व किए जाएं। देश के इस चर्चित कानूनी विवाद की अगली सुनवाई अब 17 नवंबर 2026 को तय की गई है। इस बीच, अभिषेक शर्मा वर्तमान में इंग्लैंड के खिलाफ चल रही टी20 (T20I) सीरीज के लिए भारतीय टीम के साथ इंग्लैंड दौरे पर हैं।

एआई (AI) जनरेटेड और मॉर्फ्ड कंटेंट पर मचा बवाल, वकील बोले— हटाए गए कई आपत्तिजनक यूआरएल

अदालत में सुनवाई के दौरान क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील गौरव बहल ने एक अतिरिक्त हलफनामा (अफ़िडेविट) रिकॉर्ड पर पेश किया। उन्होंने माननीय कोर्ट को अवगत कराया कि क्रिकेटर की छवि को धूमिल करने वाले और उनके अधिकारों का हनन करने वाले कई विवादित व आपत्तिजनक यूआरएल (URLs) को इंटरनेट से सफलतापूर्वक हटा दिया गया है। दूसरी ओर, दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया कंपनी मेटा (Meta Platforms) की तरफ से पेश हुए वकील वरुण पाठक ने अदालत को बताया कि उनके प्लेटफॉर्म पर अब इस पूरे विवाद से जुड़े केवल दो ही यूआरएल ऐसे बचे हैं, जो वर्तमान में एक्टिव या एक्सेसिबल हैं। अभिषेक के वकील ने कोर्ट से उन सभी एंटिटीज और वेबसाइट्स पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है, जो इस तरह के विवादित हाइपरलिंक बनाकर कंटेंट को बढ़ावा दे रही हैं। हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि अंतरिम रोक पर कोई भी फैसला लेने से पहले प्रतिवादियों को समन तामील कराना अनिवार्य है।

क्या है यह पूरा मुकदमा? पर्सनैलिटी राइट्स और मानहानि के बीच दिखी 'पतली लाइन'

यह पूरा कानूनी विवाद ऑनलाइन जगत में सेलिब्रिटीज की सुरक्षा को लेकर एक नया अध्याय लिख रहा है। दरअसल, यह मुकदमा इंटरनेट और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभिषेक शर्मा के नाम, उनकी तस्वीरों और वीडियो का कथित तौर पर बिना इजाजत (Unauthorised Use) इस्तेमाल करने को लेकर है। सबसे गंभीर बात यह है कि इस विवादित कंटेंट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाई गई तस्वीरें और ऑनलाइन तकनीक से बदले गए (Morphing) आपत्तिजनक विजुअल्स शामिल हैं, जिससे खिलाड़ी की छवि प्रभावित हो रही थी। पिछली सुनवाई में जस्टिस ज्योति सिंह ने पर्सनैलिटी राइट्स के कानूनी दायरे की विस्तृत जांच की थी। उन्होंने कोर्ट रूम में टिप्पणी करते हुए कहा था कि ऐसे ऑनलाइन मामलों में अक्सर 'पर्सनैलिटी राइट्स' (व्यक्तित्व के अधिकार) और 'मानहानि' (Defamation) के बीच एक बेहद पतली लाइन (Thin Line) होती है, क्योंकि कई बार ये दोनों कानूनी क्षेत्र आपस में ओवरलैप हो जाते हैं।

मेटा की अदालत में दलील: हर आपत्तिजनक पोस्ट अधिकारों का उल्लंघन नहीं, इंटरनेट साफ करना हमारा काम नहीं

इस मामले में सोशल मीडिया इंटरमीडियरी कंपनी मेटा ने अदालत के सामने अपना एक अलग तर्क पेश किया है। मेटा के वकील ने दलील दी कि इंटरनेट या सोशल मीडिया पर पब्लिश होने वाली हर एक आपत्तिजनक या मानहानिकारक पोस्ट को अनिवार्य रूप से पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। कंपनी ने यह भी कहा कि अगर टेक इंटरमीडियरीज़ को हर बार वादी द्वारा दी जाने वाली यूआरएल की एक लगातार बढ़ती लंबी लिस्ट को मैन्युअली हटाने का आदेश दिया जाता रहेगा, तो इसका मतलब यह होगा कि कंपनियों को पूरे "इंटरनेट को क्लीन अप" करने के काम में जुटना पड़ेगा, जो कि व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। अदालत अब इन दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखते हुए नवंबर में होने वाली अगली सुनवाई में इस पर बड़ा फैसला ले सकती है।