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October 16 2026 08:48 am

'थालापति' विजय की ऐतिहासिक जीत का डिकोड: कैसे 25% से 35% तक पहुंचा वोट बैंक

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India News Live,Digital Desk : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में थालापति विजय की पार्टी 'तमिझागा वेत्री कड़गम' (TVK) की जीत ने भारतीय राजनीति में एक नई लकीर खींच दी है। पहली बार चुनाव लड़कर सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाले विजय की इस सफलता के पीछे की असली कहानी क्या थी? एक्सिस माई इंडिया के प्रमुख प्रदीप गुप्ता ने इस 'पॉलिटिकल फेनोमेनन' का विस्तार से विश्लेषण किया है।

जीत का 'प्रोग्रेसिव ग्राफ': कैसे बदली तस्वीर?

प्रदीप गुप्ता के अनुसार, विजय का उभार अचानक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और निरंतर प्रक्रिया थी। उनकी एजेंसी के डेटा विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि चुनाव से एक साल पहले ही उनके पास एक मजबूत आधार तैयार था:

चुनाव से 1 साल पहले: 25% समर्थन।

चुनाव से 6 महीने पहले: 25% (स्थिरता)।

चुनाव से 3 महीने पहले: 28% (बढ़त की शुरुआत)।

चुनाव से 1 महीना पहले: 30% (मजबूती)।

मतदान के दिन: 35% (ऐतिहासिक मुकाम)।

गुप्ता बताते हैं कि टीवीके ने ठीक 35% वोट शेयर हासिल किया, जो उनकी एजेंसी के पूर्वानुमान के सटीक दायरे में था। उन्होंने अपनी एजेंसी के अनुमान (98 से 120 सीटें) का जिक्र करते हुए कहा कि 108 सीटें जीतकर टीवीके ने सरकार बनाने का जादुई आंकड़ा हासिल किया।

विजय 'विकल्प' कैसे बने?

प्रदीप गुप्ता के अनुसार, विजय की जीत के पीछे तीन प्रमुख कारक रहे:

द्रविड़ पार्टियों का खालीपन: लगभग 50 वर्षों से तमिलनाडु की राजनीति केवल DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूम रही थी। पूर्व सीएम जे. जयललिता के निधन के बाद AIADMK का कमजोर होना और 'बदलाव की चाह' रखने वाला एक युवा तमिलनाडु, विजय के लिए सबसे बड़ा अवसर साबित हुआ।

ब्रांड इक्विटी और फ़िल्मी छवि: पिछले 10 वर्षों में विजय की फिल्मों ने उन्हें एक 'सत्ता-विरोधी' और 'सिस्टम को चुनौती देने वाले' नेता के रूप में स्थापित किया। मतदाताओं ने उन्हें रील लाइफ से रियल लाइफ का 'मसीहा' मान लिया।

विश्वसनीयता: मतदाताओं को लगा कि अब तक की राजनीति से अलग विजय एक 'विश्वसनीय विकल्प' हैं। जब लोगों ने सवाल किया कि "अगर मौजूदा सरकार नहीं, तो कौन?" तो उन्हें विजय का चेहरा सबसे स्पष्ट और प्रभावशाली दिखा।

'रिस्क' और सटीक पूर्वानुमान

जब अधिकांश एग्जिट पोल अन्य गठबंधनों को आगे बता रहे थे, तब एक्सिस माई इंडिया ने विजय पर दांव लगाया। गुप्ता स्वीकार करते हैं कि चुनावी पूर्वानुमान में अनिश्चितता होती है, खासकर तब जब मत प्रतिशत में मात्र 1-2% का अंतर सीटों के नतीजों को नाटकीय रूप से बदल सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी एजेंसी ने पूरी गंभीरता से विजय के समर्थकों की बढ़त का विश्लेषण किया था, जिसने अंततः उन्हें जीत के सही मुहाने पर खड़ा किया।

संक्षेप में, थालापति विजय ने केवल अपनी लोकप्रियता के बल पर नहीं, बल्कि एक 'परिवर्तन की आकांक्षा' रखने वाले तमिलनाडु के युवा जनसांख्यिकीय (Demographics) का नेतृत्व करके यह जीत हासिल की है।