UN में भारत की गर्जना: 'नाविकों की मौत और जहाजों पर हमले बर्दाश्त नहीं', होर्मुज संकट पर दुनिया को दिया सख्त संदेश
India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से कड़ा रुख अख्तियार किया है। भारत ने दो टूक शब्दों में कहा है कि बेगुनाह नाविकों की जान लेना और वैश्विक व्यापार में रुकावट पैदा करना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। भारत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के कारण होर्मुज जलमार्ग 'जंग का अखाड़ा' बन चुका है।
'भारतीय नाविकों का खून और अर्थव्यवस्था का सवाल'
संयुक्त राष्ट्र में भारत के एम्बेसडर हरीश पी. ने गुरुवार को भारत का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा:
ऊर्जा सुरक्षा: भारत के लिए अपनी ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से होर्मुज से होने वाला व्यापार 'लाइफलाइन' की तरह है।
बेगुनाहों की मौत: एम्बेसडर ने गहरा दुख जताते हुए बताया कि इस संघर्ष के दौरान जहाजों पर काम करने वाले कई भारतीय नाविकों को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
हमलों की निंदा: भारत ने व्यापारिक जहाजों को सैन्य निशाना बनाने की कड़ी आलोचना की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया।
भारत की 3 बड़ी मांगें: कूटनीति ही एकमात्र रास्ता
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संघर्षरत देशों के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं:
बेरोकटोक व्यापार: होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित और स्वतंत्र आवाजाही को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए।
संप्रभुता का सम्मान: सभी देश एक-दूसरे की सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करें।
संयम और कूटनीति: भारत ने 28 फरवरी 2026 से जारी इस संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की है।
अंतरराष्ट्रीय दबाव: चीन ने भी दिखाई आंख
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि चीन ने भी इस संकट पर चिंता जताई है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अपने ईरानी समकक्ष से फोन पर बात करते हुए कहा कि होर्मुज को खोलना अब केवल क्षेत्रीय मांग नहीं, बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की इच्छा है। चीन ने कहा कि ईरान की संप्रभुता का सम्मान होना चाहिए, लेकिन समुद्री सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता की गारंटी देना भी अनिवार्य है।
नाकाबंदी और तनाव का केंद्र बना 'होर्मुज'
पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज पर सख्त नाकेबंदी का ऐलान किया था।
अमेरिका का रुख: अमेरिकी नौसेना किसी भी संदिग्ध जहाज को आगे नहीं बढ़ने दे रही है।
ईरान का दावा: ईरान अब भी इस जलमार्ग पर अपने पूर्ण नियंत्रण की बात दोहरा रहा है और अमेरिकी कार्रवाई को अवैध बता रहा है।
हकीकत: इस सैन्य खींचतान के बीच भारत के 10 से ज्यादा जहाज फंसे हुए हैं और तेल-गैस की सप्लाई पर बड़ा संकट मंडरा रहा है।
भारत की इस 'दो टूक' ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा और अपने नागरिकों की जान के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।