CSA Agricultural University पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, राज्यमंत्री ने कराई शिकायत, कुलपति ने दी सफाई

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India News Live,Digital Desk : चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) एक बार फिर विवादों में है। इस बार वित्तीय गड़बड़ियों का आरोप सीधे जल शक्ति विभाग के राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने लगाया है। उन्होंने शासन को पत्र लिखकर मामले की जांच कराने की मांग की है।

राज्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि विश्वविद्यालय ने शासनादेशों का उल्लंघन करते हुए केंद्र सरकार की योजनाओं में कार्यरत कर्मचारियों को गैर-योजना के उच्च पदों पर तैनात कर दिया है और उसी हिसाब से उन्हें वेतन भी दिया जा रहा है। इसमें कुलसचिव डॉ. नौशाद खान, निदेशक शोध डॉ. पीके सिंह, निदेशक प्रसार डॉ. आरके यादव और निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र डॉ. विजय कुमार यादव का नाम भी शामिल है।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि एग्रीप नार्प और कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में काम करने वाले कर्मचारियों को शैक्षिक संवर्ग का लाभ नहीं दिया जा सकता। साथ ही, आईसीएआर की विभिन्न योजनाओं में नियुक्त कर्मचारियों को करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) का फायदा भी नियमों के अनुसार नहीं मिलना चाहिए। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ऐसे कर्मचारियों को न केवल सीएएस का लाभ दे रहा है बल्कि उनकी सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष तय कर रहा है, जिससे वित्तीय अनियमितताएं सामने आ रही हैं।

वहीं, इस मामले में कुलपति डॉ. आनंद कुमार सिंह ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि एग्रीप योजना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) से संचालित होती है और प्रबंधन की स्वीकृति के बाद ही कर्मचारियों को सीएएस का लाभ दिया जाता है। इस योजना में 75 प्रतिशत खर्च आईसीएआर और 25 प्रतिशत राज्य सरकार उठाती है। आईसीएआर ने रिटायरमेंट की आयु सीमा को लेकर भी स्पष्ट पत्र जारी कर दिया है। कुलपति ने कहा कि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप निराधार हैं और शासन को इस संबंध में विस्तृत जवाब भेजा जाएगा।