चीनी मोबाइल कवर पर कसेगा शिकंजा: 5 साल के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश
स्मार्टफोन स्क्रीन गार्ड पर कड़े बीआईएस (BIS) मानकों के बाद अब केंद्र सरकार चीन से आने वाले बेहद सस्ते और घटिया मोबाइल कवर्स पर बड़ा शिकंजा कसने की पूरी तैयारी में है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाले व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) ने अपनी विस्तृत जांच पूरी करते हुए चीन से आयात होने वाले मोबाइल कवर्स पर अगले 5 साल के लिए एंटी-डंपिंग ड्यूटी (Anti-Dumping Duty) लगाने की आधिकारिक सिफारिश कर दी है।
जांच में सामने आया है कि चीनी कंपनियां भारतीय बाजार में लागत से भी कम कीमत पर माल 'डंप' कर रही थीं, जिससे देश का स्थानीय विनिर्माण पूरी तरह संकट में घिर गया था। अब इस सिफारिश पर अंतिम मुहर वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) को लगानी है, जिसके बाद इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाएगा।
कितनी ड्यूटी की हुई है सिफारिश?
डीजीटीआर की अंतिम जांच रिपोर्ट के अनुसार, चीन से आने वाले मोबाइल फोन कवर्स पर स्पष्ट शुल्क तय किया गया है:
शुल्क की दर: चीनी मोबाइल कवर्स पर $72 प्रति 1,000 पीस (यानी करीब ₹6.15 प्रति कवर) की एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की गई है।
अवधि: केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी होने की तारीख से यह शुल्क अगले 5 वर्षों तक प्रभावी रहेगा।
किसे छूट और किसे नहीं: 'एस्किन एरामिड फाइबर' (Askin Aramid Fibre) जैसे सुपर प्रीमियम मटेरियल से बने मोबाइल कवर्स को इस ड्यूटी के दायरे से बाहर रखा गया है, क्योंकि इनका निर्माण भारत में नहीं होता। हालांकि, आम तौर पर बिकने वाले सिलिकॉन, टीपीयू और स्पेशलाइज्ड नॉन-येलोइंग पॉलीकार्बोनेट कवर्स पर यह ड्यूटी लागू होगी।
आयात में 76 गुना उछाल: ₹18 का कवर ₹2 में डंप करने लगा चीन
ऑल इंडिया मोबाइल कवर्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन की शिकायत पर शुरू हुई जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
आयात में भारी विस्फोट: वित्त वर्ष 2021-22 में चीन से महज 10 लाख मोबाइल कवर भारत आए थे, जो 2023-24 तक 76 गुना बढ़कर 765 लाख पीस के पार पहुंच गए।
कीमतों में कृत्रिम गिरावट: 2021-22 में चीन से आने वाले एक कवर की औसत आयात लागत ₹18.37 थी, जो जांच अवधि (2024-25) के दौरान गिरकर मात्र ₹2.14 प्रति पीस रह गई।
भारतीय बाजार पर कब्जा: सस्ते आयात के दम पर चीन ने भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी 2% से बढ़ाकर सीधे 51% कर ली, जबकि भारतीय निर्माताओं की बाजार हिस्सेदारी 98% से घटकर महज 49% पर सिमट गई।
संकट में फंसे घरेलू MSME: 10 से ज्यादा फैक्ट्रियों पर लटके ताले
भारत में मोबाइल कवर्स बनाने वाली 40 से अधिक प्रमुख निर्माण इकाइयां हैं, जो मुख्य रूप से राजकोट (गुजरात), दिल्ली-एनसीआर और महाराष्ट्र में स्थित हैं। ये सभी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) सेक्टर के अंतर्गत आती हैं।
सस्ते चीनी आयात के कारण भारतीय फैक्ट्रियों में उत्पादन क्षमता का उपयोग घटकर केवल 27% से 30% रह गया था। लगातार हो रहे घाटे और गोदामों में माल डंप पड़े रहने के कारण जांच अवधि के दौरान ही देश के 10 से अधिक घरेलू उत्पादकों को अपना कारोबार हमेशा के लिए बंद करना पड़ा। सरकार का यह कदम इन छोटे घरेलू विनिर्माताओं को संजीवनी देने और 'मेक इन इंडिया' को सुरक्षित रखने के मकसद से उठाया गया है।
क्या आम ग्राहकों के लिए महंगे हो जाएंगे मोबाइल कवर?
डीजीटीआर और उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, आम उपभोक्ताओं की जेब पर इस फैसले का कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा:
खुदरा कीमतों पर मामूली असर: मोबाइल कवर की खुदरा कीमत पर इस एंटी-डंपिंग ड्यूटी का कुल असर 1% से भी कम (लगभग 0.93%) आंका गया है।
उचित प्रतिस्पर्धा: सरकार का उद्देश्य आयात को प्रतिबंधित करना नहीं, बल्कि निष्पक्ष व्यापार (Fair Trade) को बढ़ावा देना है। फुटपाथ या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ₹100 से ₹200 में बिकने वाले कवर्स पर ₹6 के अतिरिक्त शुल्क से खुदरा बाजार में कीमतों में कोई नाटकीय फेरबदल नहीं होगा, जबकि घरेलू फैक्ट्रियों को बराबरी का मुकाबला करने का मौका मिलेगा।