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July 12 2026 10:24 am

Controversy over ethanol in petrol: सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची गाड़ी मालिकों की चिंता

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India News Live,Digital Desk : पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस तरह का ईंधन कई वाहनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है और इससे इंजन की उम्र कम होने के साथ ईंधन दक्षता (फ्यूल एफिशिएंसी) भी प्रभावित हो रही है।

याचिका में मांग की गई है कि देशभर के सभी पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल-मुक्त पेट्रोल का विकल्प उपलब्ध कराया जाए ताकि वाहन मालिक अपनी पसंद का ईंधन चुन सकें।

याचिका में क्या हैं मुख्य बिंदु?

याचिकाकर्ता अधिवक्ता अक्षय मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय को इस संबंध में निर्देश देने की गुहार लगाई है।

उनका कहना है कि 2023 से पहले बनाए गए वाहन और कुछ बीएस-6 मॉडल भी इतने उच्च इथेनॉल स्तर को सहन करने में सक्षम नहीं हैं।

लाखों वाहन मालिक पेट्रोल पंपों पर मजबूरी में ऐसा ईंधन भरवा रहे हैं जो उनके वाहनों के लिए सुरक्षित नहीं है।

राष्ट्रव्यापी अध्ययन की मांग

याचिका में यह भी कहा गया है कि 20% इथेनॉल मिश्रण के प्रभाव को समझने के लिए एक राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन किया जाना चाहिए। इससे यह पता चलेगा कि यह नीति वाहन मालिकों और वाहन उद्योग पर कितना असर डाल रही है।

इसके अलावा, पंप पर ग्राहकों को स्पष्ट चेतावनी देने की भी मांग है ताकि वे अपने वाहन की जरूरत के अनुसार ही ईंधन चुन सकें।

अमेरिका और यूरोप का उदाहरण

याचिका में दावा किया गया है कि अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में ईंधन पर स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि उसमें कितना इथेनॉल मिला है। वहां पर ग्राहकों को इथेनॉल-मुक्त पेट्रोल का विकल्प भी आसानी से मिलता है।
भारत में हालांकि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे वाहन मालिकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

पेट्रोल-इथेनॉल विवाद पर अगली सुनवाई

इस मामले पर मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई सोमवार को सुनवाई कर सकते हैं। यह याचिका देशभर के वाहन मालिकों की चिंताओं को सामने रखती है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़ा फैसला हो सकता है।