Conflict of interest सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई ने पूर्व न्यायाधीश के भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई से खुद को किया अलग
India News Live,Digital Desk : भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक अहम और पारदर्शिता भरा कदम उठाते हुए, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। यह मामला बंबई हाई कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एस.एन. वर्मा से संबंधित है, जिनके खिलाफ कदाचार (misconduct) की शिकायत और सीबीआई जांच के तहत वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।
जस्टिस गवई ने अपनी इस बेंच से अलग होने का कारण 'हितों का टकराव' (Conflict of Interest) बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायमूर्ति वर्मा जब विवादों में घिरे थे, तब जस्टिस गवई एक वकील के तौर पर उनके मामले में उनकी पैरवी कर चुके हैं। न्यायिक नैतिकता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने खुद को इस सुनवाई से हटाने का फैसला किया।
दरअसल, जस्टिस एस.एन. वर्मा की याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज सीबीआई की एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) और बॉम्बे हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार (सतर्कता) द्वारा प्रस्तुत कदाचार की रिपोर्ट को रद्द करने की मांग की है। सीबीआई ने कथित तौर पर अनुचित संपत्ति के मामले में जस्टिस वर्मा के खिलाफ जांच शुरू की थी। यह मामला तब प्रकाश में आया था जब जस्टिस वर्मा के एक रिश्तेदार के घर से एक अन्य न्यायाधीश से जुड़े तलाशी अभियान के दौरान नकदी का एक बैग मिला था। बॉम्बे हाई कोर्ट की सतर्कता रिपोर्ट ने भी जस्टिस वर्मा के कदाचार पर गंभीर सवाल उठाए थे।
जस्टिस गवई के इस कदम को न्यायिक पारदर्शिता और ईमानदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अब यह मामला सुनवाई के लिए किसी अन्य बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा, ताकि पूर्व न्यायाधीश के खिलाफ लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच और सुनवाई सुनिश्चित हो सके।