बंद कमरे में टिप्पणी आसान, सुरक्षा हटा दी तो भीगी बिल्ली बनने में देर नहीं लगेगी': पुलिस पदक समारोह में बरसे सीएम योगी
उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली को लेकर हाल के दिनों में अदालतों व विपक्षी दलों द्वारा की गई टिप्पणियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस बल का खुलकर बचाव करते हुए आलोचकों पर जोरदार पलटवार किया है। राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित पुलिस पदक अलंकरण समारोह के मंच से मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि बंद कमरों में बैठकर किसी भी व्यवस्था या पुलिस के काम पर टिप्पणी करना बहुत आसान होता है। बाहर सुरक्षा का पुख्ता बंदोबस्त होता है, तभी अंदर बैठकर स्वस्थ चिंतन और चर्चाएं संभव हो पाती हैं। सीएम योगी ने तल्ख लहजे में कहा कि व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो और उसे अपने पद का कितना भी गुरूर क्यों न हो, अगर उसकी सुरक्षा हटा दी जाए और अराजकता का माहौल बन जाए, तो उसे 'भीगी बिल्ली' बनने में देर नहीं लगेगी।
सुरक्षित माहौल में ही संभव है चिंतन, समाज की समृद्धि के लिए सुरक्षा पहली शर्त
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कानून का राज और सुरक्षित वातावरण होता है, तभी समाज की तरक्की और विकास की कल्पना को धरातल पर उतारा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जो लोग एसी कमरों में बैठकर सुरक्षा बलों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं, वे यह भूल जाते हैं कि धूप, बारिश, ठंड और त्योहारों के दौरान सड़कों पर तैनात पुलिसकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर आम नागरिक को चैन की नींद और सुरक्षा का अहसास कराते हैं। सीएम ने कहा कि समाज में शांति और अमन-चैन बनाए रखने के लिए खाकी वर्दी जो त्याग और बलिदान देती है, उसका सम्मान होना चाहिए। बिना सुरक्षा व्यवस्था के कोई भी बौद्धिक विमर्श या सामान्य जनजीवन सुचारू रूप से नहीं चल सकता।
2017 से पहले दंगे और कर्फ्यू आम थे, बेबस नजर आती थी पुलिस: सीएम योगी
पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि साल 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में हर जिले में संगठित अपराधियों और माफिया का बोलबाला था। वे समानांतर सरकार चलाते थे और शासन के अभाव में पुलिस उनके सामने पूरी तरह बेबस दिखाई देती थी। कोसीकलां, मेरठ, अलीगढ़ और मुजफ्फरनगर के दंगों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौर में महीनों तक कर्फ्यू लगा रहता था और प्रदेश पहचान के गंभीर संकट से जूझ रहा था। पुलिसकर्मियों को जर्जर और टूटे-फूटे भवनों में रहने के लिए विवश होना पड़ता था, पीएसी की वाहिनियां खत्म कर दी गई थीं और पूरे राज्य में साल भर में सिर्फ छह हजार पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने की क्षमता बची थी।
सात पुलिस कमिश्नरेट और 14 लाख कैमरे: आधुनिक तकनीक से बदली यूपी पुलिस की तस्वीर
संबोधन के दौरान सीएम योगी ने 2017 के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस में हुए संरचनात्मक सुधारों का ब्योरा रखा। उन्होंने कहा कि सरकार ने 'पॉलिसी पैरालिसिस' से बाहर निकलकर पुलिस का आधुनिकीकरण किया। आज प्रदेश के 7 बड़े शहरों में पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली सफलतापूर्वक कार्य कर रही है। पूरे राज्य में तीसरी आंख के रूप में 14 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं, जो न सिर्फ वारदातों के त्वरित खुलासे में मदद कर रहे हैं बल्कि अपराध की रोकथाम में भी बेहद कारगर साबित हो रहे हैं। इसके साथ ही जिलों में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किए गए हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने तकनीक से लैस 87 आधुनिक पुलिस इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
पहली बार मिला कीर्ति चक्र, शहीद इंस्पेक्टर सुनील कुमार की शहादत को नमन
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने यूपी एसटीएफ के वीरगति को प्राप्त जांबाज इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धापूर्वक याद किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में पहली बार किसी जांबाज को शांतिकालीन वीरता के दूसरे सबसे बड़े सम्मान 'कीर्ति चक्र' से नवाजा गया है, जो पूरे पुलिस बल के लिए गर्व का क्षण है। इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने अपराधियों के साथ मुठभेड़ में अदम्य साहस दिखाते हुए गोली लगने के बावजूद मोर्चा संभाला था और वीरगति को प्राप्त हुए थे। सीएम योगी ने मंच पर उनकी वीरांगना पत्नी मुनेश देवी को सम्मानित किया और कहा कि सरकार हर परिस्थिति में अपने जांबाज जवानों और उनके परिवारों के साथ चट्टान की तरह खड़ी है।