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November 05 2026 10:43 pm

'हो सकता है मेरे वोट कम हो जाएं लेकिन...': बंगाल के स्कूलों में मोबाइल बैन की तैयारी, जानिए सीएम शुभेंदु अधिकारी का पूरा रोडमैप

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पश्चिम बंगाल के स्कूली शिक्षा तंत्र में अनुशासन और गुणवत्ता बहाल करने के लिए कड़े फैसलों का दौर शुरू होने जा रहा है। कोलकाता के न्यूटाउन में शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक राज्यस्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नेतृत्व ने साफ कर दिया कि छात्रों के भविष्य की कीमत पर राजनीतिक नफा-नुकसान की चिंता नहीं की जाएगी। मंच से दो टूक शब्दों में कहा गया—"हो सकता है कि इससे मेरे कुछ वोट कम हो जाएं, लेकिन फिर भी मैं कहूंगा कि स्कूलों में मोबाइल फोन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए।" छात्र-छात्राओं में स्मार्टफोन की लत और देर रात तक स्क्रीन देखने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि सरकार राज्य भर के स्कूलों में मोबाइल फोन पर सख्त पाबंदी लगाने को लेकर बेहद कठोर नियम लागू करने जा रही है।

गुजरात मॉडल का हवाला: कक्षा 1 से 12वीं तक फोन पर पाबंदी का विचार

मंच से अन्य राज्यों के कड़े नियमों का उदाहरण देते हुए कहा गया कि गुजरात में पहली से लेकर बारहवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए स्कूलों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक है। इसी मॉडल की तर्ज पर बंगाल में भी कक्षाओं के भीतर अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

अभिभावकों को भी सचेत करते हुए कहा गया कि:

स्वास्थ्य और पढ़ाई पर बुरा असर: कई ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं जहां माता-पिता के सोने के बाद बच्चे देर रात तक मोबाइल स्क्रीन से चिपके रहते हैं। इससे उनकी मानसिक एकाग्रता, आंखों और पढ़ाई की गुणवत्ता पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

अभिभावक रखें निगरानी: इस समस्या से निपटने के लिए केवल स्कूल ही नहीं, बल्कि घरों में भी माता-पिता को सतर्कता बरतनी होगी।

कड़े फैसलों की तैयारी: शिक्षा के माहौल को मोबाइल के भटकाव से मुक्त कराने के लिए सरकार आने वाले दिनों में नियामक दिशा-निर्देश जारी करने पर विचार कर रही है।

हर जिले में दो 'सीएम श्री' स्कूल: केंद्र की 'पीएम श्री' तर्ज पर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर

स्कूलों में अनुशासन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना का ऐलान किया गया है:

प्रत्येक जिले में दो 'सीएम श्री' स्कूल: केंद्र सरकार की 'पीएम श्री' (PM SHRI) योजना की तर्ज पर राज्य के प्रत्येक जिले में दो मॉडल स्कूल खोले जाएंगे।

कक्षा 6 से मेरिट पर दाखिला: इन अत्याधुनिक स्कूलों में कक्षा 6 से मेधा (मेरिट) के आधार पर विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा।

स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक तकनीक: सेंट्रल मॉडल स्कूलों की तरह इन विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड, आधुनिक विज्ञान प्रयोगशालाएं और डिजिटल लर्निंग टूल्स की व्यवस्था होगी।

खेल उत्कृष्टता केंद्र: राज्य के उत्तरी और पश्चिमी जिलों में खेलों को बढ़ावा देने और प्रतिभाओं को तराशने के लिए बड़े स्पोर्ट्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे।

बुनियादी ढांचे की बदहाली और 19 हजार स्कूलों की स्थिति

संबोधन के दौरान राज्य के सरकारी स्कूलों की मौजूदा बदहाली पर गहरी चिंता जताई गई। आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि आजादी के दशकों बाद भी राज्य के करीब 19,000 स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है।

कोलकाता के प्रतिष्ठित मित्रा इंस्टीट्यूशन में एक छात्र को सांप काटने की हालिया घटना का जिक्र करते हुए कहा गया कि स्कूलों को मिलने वाले कंपोजिट ग्रांट (रखरखाव अनुदान) के रुकने के कारण स्कूलों में साफ-सफाई और सुरक्षा उपाय तक प्रभावित हुए हैं। शिक्षकों से अपील की गई कि वे छात्रों को फिर से अकादमिक उत्कृष्टता की मुख्यधारा में लाने का संकल्प लें ताकि बंगाल देश के शीर्ष छह राज्यों के शिक्षा ढांचे में अपनी जगह बना सके।

शिक्षक भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट की समयसीमा का आश्वासन

शिक्षा क्षेत्र के सबसे संवेदनशील मुद्दे यानी स्कूल सेवा आयोग (SSC शिक्षक भर्ती) पर भी रुख स्पष्ट किया गया। यह भरोसा दिलाया गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई तय समयसीमा के भीतर ही शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाएगा। इसके साथ ही भविष्य की भर्ती परीक्षाओं में इंटरव्यू (मौखिक परीक्षा) के अंक कम कर लिखित परीक्षा (रिटन टेस्ट) को अधिक वेटेज देने की व्यवस्था बनाई जाएगी, ताकि चयन प्रक्रिया में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार या पक्षपात की गुंजाइश को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।