चीन की नई हिमाकत: अरुणाचल प्रदेश को बताया 'अवैध', भारत के कड़े विरोध के बावजूद 'नाम बदलने' के दावे पर अड़ा

Post

India News Live,Digital Desk : भारत और चीन के बीच सीमा विवाद एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है। चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत के अभिन्न अंग 'अरुणाचल प्रदेश' को लेकर फिर से जहर उगला है। चीनी विदेश मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश को 'तथाकथित' करार देते हुए इसे भारत द्वारा अवैध रूप से स्थापित क्षेत्र बताया है। चीन का दावा है कि वह 'जांगनान' (अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम) में स्थानों के नाम रखने का संप्रभु अधिकार रखता है।

चीन का दावा: 'जांगनान हमारा इलाका, भारत का कब्जा अवैध'

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में विवादित बयान देते हुए कहा कि चीन ने भारत द्वारा बनाए गए तथाकथित 'अरुणाचल प्रदेश' को कभी मान्यता नहीं दी है। उनके अनुसार, जांगनान चीन का हिस्सा है और वहां के भौगोलिक स्थानों के नाम अपनी भाषा में बदलना उनका अधिकार है। बता दें कि चीन साल 2017 से लगातार अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न गांवों, पहाड़ों और नदियों के काल्पनिक नाम जारी कर अपनी दावेदारी ठोकने की नाकाम कोशिश करता रहा है।

भारत का करारा जवाब: 'काल्पनिक नाम देने से हकीकत नहीं बदलती'

भारत ने चीन की इस हरकत पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। भारत ने चेतावनी दी है कि चीन की ऐसी एकतरफा कोशिशें द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने के प्रयासों को भारी नुकसान पहुँचा सकती हैं।

एलएसी (LAC) के पास नई 'काउंटी' से बढ़ी चिंता

अरुणाचल के साथ-साथ चीन पश्चिमी सेक्टर यानी लद्दाख सीमा पर भी अपनी पैठ बढ़ाने में जुटा है।

सेनलिंग काउंटी: चीन ने हाल ही में शिनजियांग क्षेत्र में 'सेनलिंग काउंटी' के गठन की घोषणा की है। यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) और अफगानिस्तान के करीब स्थित है।

लद्दाख पर नजर: भारत पहले ही चीन की 'हेआन' और 'हेकांग' काउंटी के गठन का विरोध कर चुका है, क्योंकि इनका कुछ हिस्सा भारतीय केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के अधिकार क्षेत्र में आता है।

दोहरी चाल: एक तरफ दावा, दूसरी तरफ 'शांति' की बात

हैरानी की बात यह है कि एक तरफ चीन भारत की क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती दे रहा है, तो दूसरी तरफ प्रवक्ता जियाकुन ने यह भी कहा कि चीन-भारत संबंध फिलहाल 'स्थिर' हैं और चीन संबंधों को बेहतर बनाने की नीति पर कायम है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह 'सलामी स्लाइसिंग' की रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह धीरे-धीरे दबाव बनाकर सीमा पर यथास्थिति बदलने की कोशिश करता है।