Chandra Grahan 2026: चंद्र ग्रहण के बाद राशि अनुसार करें इन चीजों का दान, चमक जाएगी किस्मत और घर आएगी सुख-समृद्धि
India News Live,Digital Desk : साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण आज यानी 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के पावन अवसर पर लग रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहण के दौरान राहु-केतु जैसे मायावी ग्रहों का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे प्रकृति और मानवीय जीवन पर नकारात्मक असर पड़ता है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और सूतक काल दोनों ही प्रभावी होंगे। मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के अशुभ प्रभाव को कम करने और शुभ फलों की प्राप्ति के लिए ग्रहण के बाद दान करना 'अक्षय पुण्य' के समान होता है।
सूतक और ग्रहण का समय: कब तक रहें सावधान?
आज सुबह से ही सूतक काल प्रभावी हो चुका है। इस दौरान मंदिरों के पट बंद रहते हैं और कोई भी मांगलिक कार्य नहीं किया जाता।
सूतक काल: सुबह 09:39 बजे से शाम 06:46 बजे तक
ग्रहण का मध्य (पूर्ण ग्रहण): शाम 05:04 बजे
ग्रहण व सूतक समापन: शाम 06:46 बजे
ग्रहण के बाद क्या करें?
शाम को ग्रहण समाप्त होने के तुरंत बाद पूरे घर में गंगाजल का छिड़काव करें। स्वयं शुद्ध जल से स्नान करें और घर के मंदिर में दीप जलाकर भगवान विष्णु व महादेव की आराधना करें। इसके पश्चात अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य करना चाहिए।
राशि अनुसार दान की सूची: जानें आपके लिए क्या है शुभ
ज्योतिषियों के अनुसार, यदि आप अपनी राशि के स्वामी ग्रह के अनुकूल वस्तुओं का दान करते हैं, तो कुंडली के दोष दूर होते हैं।
| राशि | दान की जाने वाली वस्तु | संभावित लाभ |
|---|---|---|
| मेष | मसूर की दाल | शत्रुओं पर विजय और साहस में वृद्धि |
| वृषभ | चावल और आटा | सुख-सुविधाओं और धन में बढ़ोतरी |
| मिथुन | गौशाला में हरा चारा व धन | व्यापार में सफलता और अटका धन मिलेगा |
| कर्क | खीर (सफेद मिठाई) | मानसिक तनाव से मुक्ति और शांति |
| सिंह | गेहूं | करियर में तरक्की और मान-सम्मान |
| कन्या | मूंग की दाल | वाणी दोष दूर होगा और बुध की कृपा मिलेगी |
| तुला | सफेद वस्त्र | दांपत्य जीवन में मधुरता और आर्थिक मजबूती |
| वृश्चिक | लाल रंग के कपड़े | जॉब में प्रमोशन और ऊर्जा का संचार |
| धनु | चने की दाल और मकई | ज्ञान में वृद्धि और गुरु दोष से मुक्ति |
| मकर | साबुत उड़द की दाल | कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी |
| कुंभ | काले तिल और सरसों का तेल | शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या का प्रभाव कम होगा |
| मीन | पीले रंग के वस्त्र | पद-प्रतिष्ठा और सौभाग्य में वृद्धि |
दान का महत्व और नियम
शास्त्रों में कहा गया है कि ग्रहण के बाद दिया गया दान सीधे पितरों और देवताओं तक पहुंचता है। ध्यान रहे कि दान हमेशा निस्वार्थ भाव से और किसी जरूरतमंद ब्राह्मण या गरीब व्यक्ति को ही देना चाहिए। ग्रहण के दौरान किए गए मंत्र जप और उसके बाद किए गए दान से ग्रहों की प्रतिकूलता समाप्त होती है।