मेटा छंटनी का 'प्रलय': कंपनी छोड़ने से पहले कर्मचारियों ने लूटे स्नैक्स और चार्जर, पूर्व कर्मचारी का बड़ा खुलासा
India News Live,Digital Desk : टेक दिग्गज मेटा (Meta) में छंटनी का दौर लगातार चर्चा में बना हुआ है। हाल ही में मेटा की एक पूर्व कर्मचारी एडेल वू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने कंपनी के भीतर के तनावपूर्ण माहौल की पोल खोल दी है। उन्होंने बताया कि छंटनी के दौरान कर्मचारियों के बीच किस हद तक हताशा और अफरा-तफरी का आलम था।
"प्रलय की रात": क्या था वह मंजर?
एडेल वू ने उस समय को 'प्रलय का दिन' (Doomsday) बताते हुए कहा कि 2022 में जब मेटा ने 11,000 कर्मचारियों की छंटनी का फैसला किया, तो कंपनी में खौफनाक माहौल था। वू के अनुसार, छंटनी की घोषणा से ठीक एक रात पहले कर्मचारी डरे हुए थे और अनिश्चितता के चलते कई लोग अपने बैग को ऑफिस के मुफ्त स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक्स और लैपटॉप चार्जर से भर रहे थे। यह मेटा के 18 साल के इतिहास में सबसे बड़ी छंटनी थी, जिसने सभी को सदमे में डाल दिया।
क्यों हो रही है मेटा में लगातार छंटनी?
पूर्व कर्मचारी के अनुसार, 2021 के मुकाबले कंपनी के अंदर का माहौल पूरी तरह बदल चुका है। छंटनी के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण बताए जा रहे हैं:
मेटावर्स का घाटा: कंपनी के मेटावर्स प्रोजेक्ट में हुए भारी नुकसान ने वित्तीय स्थिति को प्रभावित किया।
एआई और ऑटोमेशन पर फोकस: कंपनी अब अपने संसाधनों को एआई और ऑटोमेशन में निवेश करने के लिए स्थानांतरित कर रही है, जिसके चलते पारंपरिक नौकरियों पर संकट गहरा गया है।
कर्मचारियों में भारी असंतोष और डर
एडेल वू के इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर मेटा के अन्य कर्मचारियों ने भी अपना दर्द साझा किया। एक कर्मचारी ने बताया कि उन्होंने कंपनी में हर छंटनी को करीब से देखा है और इस वक्त ऑफिस में चिंता का माहौल है। वहीं, एक अन्य यूजर ने तो यहां तक बताया कि उनकी टीम के एक सदस्य को 'बिजनेस ट्रिप' के दौरान बीच में ही नौकरी से निकाल दिया गया, जिसके बाद से कर्मचारियों का कंपनी पर भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है।
जानकारों का मानना है कि बड़ी आईटी कंपनियों में यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है, जहां पुरानी कार्य संस्कृति और नई तकनीक के बीच सामंजस्य बैठाना कर्मचारियों के लिए बड़ी मानसिक चुनौती बन गया है।