मैनपुरी में तालाबों पर अतिक्रमण का मामला पहुंचा NGT, कोर्ट ने यूपी सरकार को थमाया नोटिस; DM से मांगा पूरा ब्यौरा
उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले में जल संरक्षण और पर्यावरण को लेकर एक बड़ा मामला सामने आया है। जिले के विभिन्न गांवों में राजस्व अभिलेखों में दर्ज सरकारी तालाबों पर कथित अवैध कब्जे (Encroachment) और उनके रख-रखाव में लापरवाही का मामला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की प्रधान पीठ तक पहुंच गया है। एनजीटी ने इस पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार सहित संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
अधिकरण ने मैनपुरी के जिलाधिकारी (DM) को आदेश दिया है कि वे विवादित जलाशयों का पुराना राजस्व रिकॉर्ड और क्षेत्रफल का पूरा ब्यौरा एक हलफनामे (Affidavit) के साथ प्रस्तुत करें।
20 से अधिक गांवों के तालाब जांच के दायरे में
यह याचिका अजय प्रताप सिंह द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि मैनपुरी सदर और भोगांव तहसील के दर्जनों गांवों में जो जमीनें सरकारी दस्तावेजों में तालाब के रूप में दर्ज थीं, उन पर भू-माफियाओं और स्थानीय लोगों द्वारा अवैध निर्माण कर कब्जा कर लिया गया है।
याचिका में जिन प्रमुख गांवों के तालाबों का खाता और गाटा संख्या सहित विवरण दिया गया है, उनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
अस्योली, तालीबपुर, थोरवा, नारायणपुर, धरमंगदपुर।
अठलकड़ा, आसफपुर, जैतूलपुर, ईसापुर खास, कुशलपुर।
अरमसराय, अम्हेरा, अपूरपुर, अहमदपुर करूआमई, अकबरपुर विकू।
आलीपुर पट्टी, आलीपुर खेड़ा, अहिरवा, औंग और अजीतगंज।
कोल्ड स्टोरेज द्वारा महा-अतिक्रमण का आरोप
याचिका में मैनपुरी के कुछ बहुत बड़े जलाशयों का विशेष रूप से गाटा संख्या सहित उल्लेख किया गया है:
अस्योली गांव: यहां गाटा संख्या 452 (मि.) का क्षेत्रफल 20.1820 हेक्टेयर और गाटा संख्या 308 (मि.) का क्षेत्रफल 19.1940 हेक्टेयर का विशाल तालाब है।
थोरवा गांव: यहां गाटा संख्या 769 के तहत 9.4790 हेक्टेयर का जलाशय दर्ज है।
अजीतगंज (रागिनी कोल्ड स्टोरेज): याचिकाकर्ता ने सबसे बड़ा आरोप अजीतगंज गांव को लेकर लगाया है। दावा है कि यहाँ के गाटा संख्या 1045 पर, जो सरकारी कागजों में 0.6110 हेक्टेयर का तालाब था, उस पर अवैध रूप से 'रागिनी कोल्ड स्टोरेज' का निर्माण कर लिया गया है। साक्ष्य के रूप में इन तालाबों की गूगल सैटेलाइट इमेजेस (Google Images) भी कोर्ट को सौंपी गई हैं।
अधिकारियों की लापरवाही पर एनजीटी सख्त, 28 सितंबर को अगली सुनवाई
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए माना कि यह पूरी तरह से पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। अधिकरण ने जिलाधिकारी मैनपुरी को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले सभी तालाबों का मूल क्षेत्रफल और पुराने रिकॉर्ड्स शपथपत्र के साथ कोर्ट में दाखिल करें। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को तय की गई है।
मैनपुरी जिलाधिकारी (DM) का क्या है कहना?
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मैनपुरी के डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि अजीतगंज के गाटा संख्या 1045 पर कोल्ड स्टोरेज के निर्माण का मामला मीडिया के जरिए उनके संज्ञान में आया है, लेकिन अभी तक एनजीटी का आधिकारिक पत्र जिला प्रशासन को प्राप्त नहीं हुआ है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे ही कोर्ट का आदेश मिलेगा, राजस्व विभाग की टीम लगाकर आवश्यक डाटा और पुराना रिकॉर्ड एकत्रित कर रिपोर्ट भेज दी जाएगी। डीएम ने यह भी दावा किया कि मैनपुरी जिले में वर्तमान में सरकारी और निजी जमीनों से अवैध कब्जा हटाने के लिए एक साप्ताहिक विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत तालाबों, चकमार्गों और चरागाहों से अवैध निर्माणों को लगातार ध्वस्त किया जा रहा है।