कलकत्ता हाई कोर्ट ने मांगी रिपोर्ट : बंगाल की जेलों में बंद बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थियों का क्या होगा
India News Live,Digital Desk : कलकत्ता हाई कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार से राज्य की जेलों में बंद बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थियों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने पूछा है कि राज्य की जेलों में फिलहाल कितने बांग्लादेशी हिंदू बंदी हैं और उनके खिलाफ क्या कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
केंद्र से भी मांगी गई रिपोर्ट
कोर्ट ने केंद्र सरकार से भी यह स्पष्ट करने को कहा है कि भारत में बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थियों को आश्रय देने और नागरिकता प्रदान करने की नीति को वह कैसे लागू कर रही है।
केंद्र और राज्य—दोनों को ही दो हफ्तों के भीतर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया गया है।
जनहित याचिका में रिहाई की मांग
यह मामला गोपाल गवाली नामक व्यक्ति की ओर से दायर एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की है कि जेलों में बंद बांग्लादेशी हिंदू शरणार्थियों को तुरंत रिहा किया जाए, क्योंकि वे शरण लेने के उद्देश्य से भारत आए हैं, न कि किसी अपराध के लिए।
नागरिकता कानून से जुड़ा सवाल
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता तरुण ज्योति तिवारी ने कोर्ट में दलील दी कि
भारतीय नागरिकता (संशोधन) अधिनियम – CAA के तहत
31 दिसंबर 2014 से पहले बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी समुदाय के लोगों को
भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि सितंबर 2025 में केंद्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार
इन समुदायों के लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जा सकती,
भले ही उनके पास दस्तावेज न हों या उनके वीजा की अवधि समाप्त हो गई हो।
फिर भी क्यों हैं ये लोग जेल में?
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि
यह नीति पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न से बचने आए हिंदुओं को सुरक्षा देने के लिए बनाई गई थी।
फिर भी कई शरणार्थी बंगाल की जेलों में वर्षों से बंद हैं,
जहां उन्हें न तो राहत मिल रही है और न ही निचली अदालतों से जमानत।
अब कोर्ट के आदेश पर सबकी नजर
अब पूरे मामले पर सभी की निगाहें कलकत्ता हाई कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं।
दो सप्ताह बाद जब राज्य और केंद्र सरकार अपनी रिपोर्ट पेश करेंगी,
तब यह तय होगा कि इन शरणार्थियों को नागरिकता या रिहाई का रास्ता मिलेगा या नहीं।