BREAKING:
September 28 2026 10:02 pm

दिवाली 2026 का पूरा कैलेंडर: धनतेरस से भाई दूज तक की सही तिथियां, मुहूर्त और पंचांग गणना

Post

सनातन धर्म के सबसे बड़े और भव्य दीपोत्सव पर्व 'दीपावली' की उल्टी गिनती शुरू होते ही हर घर में पूजन, खरीदारी और साज-सज्जा की तैयारियां तेज हो जाती हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (धनतेरस) से शुरू होकर शुक्ल पक्ष की द्वितीया (भाई दूज) तक चलने वाला यह 5 दिवसीय महापर्व केवल रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि धन, ऐश्वर्य, आरोग्यता, धर्म और पारिवारिक प्रेम का विराट संगम है। साल 2026 में दिवाली का यह पावन पर्व नवंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार इस वर्ष तिथियों के संचरण के चलते पर्वों की तारीखों को लेकर विशेष स्थिति बनी है। प्रदोष काल और निशिता काल व्यापिनी कार्तिक अमावस्या को दिवाली की मुख्य लक्ष्मी पूजा संपन्न की जाती है। ऐसे में पूजा-अर्चना, दीपदान और खरीदारी के लिए सही तारीख और मुहूर्त की जानकारी होना आवश्यक है।

1. धनतेरस (धनत्रयोदशी) – 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार)

दीपावली महापर्व की विधिवत शुरुआत कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धनतेरस के पावन पर्व के साथ होती है। इस दिन समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि और धन के अधिपति कुबेर देव की पूजा की जाती है।

सोना, चांदी और बर्तन खरीदने का महत्व: इस दिन सोना, चांदी, पीतल के बर्तन, नए वाहन, धनिया और झाड़ू खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।

यम दीपदान: धनतेरस की शाम को प्रदोष काल में घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के निमित्त चौमुखा दीपक जलाया जाता है, जिससे परिवार पर अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।

शुभ मुहूर्त: शाम 05:40 बजे से रात 08:15 बजे के बीच खरीदारी और कुबेर-धन्वंतरि पूजन का सबसे उत्तम मुहूर्त रहेगा।

2. छोटी दिवाली / नरक चतुर्दशी (रूप चौदस) – 7 नवंबर 2026 (शनिवार)

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को छोटी दिवाली, नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध कर 16 हजार कन्याओं को उसके बंदीगृह से मुक्त कराया था।

अभ्यंग स्नान और यम तर्पण: इस दिन सूर्योदय से पूर्व शरीर पर तिल के तेल व उबटन का लेप लगाकर स्नान (अभ्यंग स्नान) करने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे सौंदर्य में वृद्धि होती है और पापों का नाश होता है।

दीपदान: शाम के समय घर की चौखट, छत और तुलसी के पास 14 दीपक जलाए जाते हैं। चतुर्दशी तिथि का विस्तार होने से कई स्थानों पर अभ्यंग स्नान का काल रविवार की सुबह भी मान्य रहेगा।

3. बड़ी दिवाली (लक्ष्मी पूजा) – 8 नवंबर 2026 (रविवार)

दीपावली महापर्व का मुख्य केंद्र बिंदु कार्तिक अमावस्या को मनाया जाने वाला लक्ष्मी पूजन है। पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे शुरू होगी और 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे समाप्त होगी। धर्मशास्त्रों के अनुसार जिस दिन प्रदोष काल और मध्यरात्रि (निशिता काल) में अमावस्या तिथि उपस्थित रहती है, उसी दिन दिवाली और महालक्ष्मी पूजन शास्त्रसम्मत माना जाता है। इसलिए साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर को ही मनाई जाएगी।

प्रदोष काल लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (नई दिल्ली/एनसीआर): शाम 05:54 बजे से रात 07:50 बजे तक (वृषभ लग्न / स्थिर लग्न)।

प्रदोष काल अवधि: शाम 05:31 बजे से रात 08:09 बजे तक।

महानिशिता काल (तांत्रिक व काली पूजा मुहूर्त): रात 11:39 बजे से देर रात 12:31 बजे तक।

पूजन परंपरा: इस दिन माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, कुबेर देव और मां सरस्वती की षोडशोपचार विधि से पूजा की जाती है और संपूर्ण घर को तेल व शुद्ध घी के दीयों से जगमग किया जाता है।

4. गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) – 10 नवंबर 2026 (मंगलवार)

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का महापर्व मनाया जाता है। इस दिन द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र के मानमर्दन के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका उंगली पर उठाने की स्मृति में गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजा की जाती है।

तिथि विस्तार: 9 नवंबर को दोपहर में अमावस्या समाप्त होने और उदयातिथि के पंचांगीय नियम के चलते गोवर्धन पूजा का शास्त्रीय उत्सव 10 नवंबर 2026 को उदया कालीन प्रतिपदा में संपन्न किया जाएगा।

अन्नकूट महोत्सव: मंदिरों और घरों में 56 भोग तथा विविध प्रकार की सब्जियों और अनाजों से बने अन्नकूट का भोग भगवान श्रीकृष्ण को लगाया जाता है। यह प्रकृति और गोवंश के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महापर्व है।

5. भाई दूज (यम द्वितीया) – 11 नवंबर 2026 (बुधवार)

दीपावली के 5 दिवसीय उत्सव का समापन कार्तिक शुक्ल द्वितीया यानी भाई दूज (यम द्वितीया) के साथ होता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक (अक्षत-रोली) लगाकर उनकी लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करती हैं।

पौराणिक संदर्भ: मान्यता है कि इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर भोजन करने पहुंचे थे और उन्हें वरदान दिया था कि जो भाई इस पावन तिथि पर बहन के घर भोजन कर तिलक करवाएगा, उसे यमलोक के कष्टों और अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलेगी।

तिलक और पूजन मुहूर्त: दोपहर 01:15 बजे से दोपहर 03:25 बजे के बीच भाई दूज का तिलक करना अत्यंत मंगलकारी रहेगा।