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August 19 2026 01:52 am

काशी से BJP का 'मिशन दलित'! गुरु पूर्णिमा पर संत रविदास की जन्मस्थली से 131 कलश यात्राओं का शंखनाद, जानें 8 महीने का बड़ा मास्टरप्लान

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आज (29 जुलाई) गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर भारतीय जनता पार्टी एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक मिशन का आगाज कर रही है। काशी स्थित संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर से 131 से अधिक 'कलश यात्राएं' निकाली जा रही हैं, जिनमें जन्मस्थली की पवित्र मिट्टी भरी होगी। यह मिट्टी देश के अलग-अलग राज्यों में भेजी जाएगी। भाजपा का यह मेगा आउटरीच कार्यक्रम कोई एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह आज से शुरू होकर अगले आठ महीनों तक यानी फरवरी में पड़ने वाली माघ पूर्णिमा तक चलेगा। पार्टी हफ्तों से अपने शीर्ष नेताओं की देखरेख में इस भव्य आयोजन की रूपरेखा तैयार कर रही थी।

'समरसता संकल्प सभा' में दिग्गजों का जमावड़ा

इस कलश यात्रा के साथ ही सीर गोवर्धनपुर में एक विशाल 'समरसता संकल्प सभा' का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें 20 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ेगा। इस महाकुंभ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ-साथ राज्यसभा सांसद तरुण चुग जैसी पार्टी की शीर्ष लीडरशिप शामिल हो रही है। कलश पूजन से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य संत रविदास के 'सभी जातियों और वर्गों को एक धागे में बांधने' वाले विचारों को जन-जन तक पहुंचाना है, जिससे समाज के हर तबके को पार्टी की विचारधारा से जोड़ा जा सके।

यूपी से पंजाब तक 'मिशन दलित' पर विशेष फोकस

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, इस धार्मिक और सामाजिक आयोजन के पीछे एक बेहद मजबूत राजनीतिक संदेश छिपा है। कलश यात्रा देश के विभिन्न राज्यों में जाएगी, लेकिन इसका सबसे ज्यादा फोकस उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान पर रहने वाला है। दरअसल, इन राज्यों में दलित समाज की एक बहुत बड़ी आबादी संत रविदास जी में गहरी आस्था रखती है। भाजपा इस 8 महीने लंबे अभियान के जरिए सीधे तौर पर इसी बड़े वोट बैंक को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। यह दलित वोट बैंक इतना सशक्त है कि वह अकेले ही इन राज्यों के चुनावी समीकरणों को पूरी तरह पलटने की ताकत रखता है।