क्षेत्रीय समीकरणों में बड़ा उलटफेर: ईरान के खिलाफ एक हुए इजरायल और UAE; सुरक्षा के लिए तैनात किया 'आयरन डोम'
India News Live,Digital Desk : ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण युद्ध ने मध्य पूर्व (Middle East) के पुराने नक्शों और रिश्तों को पूरी तरह बदल दिया है। एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाले घटनाक्रम में, इजरायल ने अपनी सबसे भरोसेमंद सुरक्षा ढाल 'आयरन डोम' (Iron Dome) को एक मुस्लिम देश, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षा के लिए तैनात किया है। यह पहली बार है जब इजरायल ने इस अत्याधुनिक सिस्टम को अपनी और अमेरिका की सीमा के बाहर किसी अन्य देश में सैन्य टुकड़ी के साथ भेजा है।
UAE की सुरक्षा में इजरायली सैनिक: 'असंभव' हुआ संभव
अमेरिकी न्यूज आउटलेट Axios की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के बीच हुई गुप्त बातचीत के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया।
बैटरी और सैनिक: इजरायल ने न केवल 'आयरन डोम' की बैटरी और इंटरसेप्टर मिसाइलें भेजी हैं, बल्कि उन्हें ऑपरेट करने के लिए कई दर्जन इजरायली सैनिक भी अब UAE की जमीन पर मौजूद हैं।
ऐतिहासिक कदम: विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध से पहले खाड़ी देश की जमीन पर इजरायली सैनिकों की मौजूदगी की कल्पना करना भी असंभव था, लेकिन ईरान के बढ़ते खतरे ने इन दो देशों को एक साथ ला खड़ा किया है।
ईरान का 'ड्रोन और मिसाइल' तांडव
ईरान ने इस युद्ध में UAE को भी बुरी तरह निशाना बनाया है। अमीरात के अधिकारियों द्वारा जारी आंकड़े डराने वाले हैं:
28 फरवरी से अब तक: ईरान ने UAE पर करीब 550 बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागी हैं।
ड्रोन हमला: 2200 से ज्यादा आत्मघाती ड्रोन के जरिए UAE के गैस फील्ड और बुनियादी ढांचे को दहलाने की कोशिश की गई है।
इसी खतरे को भांपते हुए इजरायली वायुसेना ने दक्षिणी ईरान में उन ठिकानों को भी निशाना बनाया, जहां से ये मिसाइलें UAE की ओर दागी जा रही थीं।
क्यों अहम है यह 'आयरन डोम' डिप्लोमेसी?
आयरन डोम दुनिया का सबसे सफल शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम है, जो कम दूरी की मिसाइलों और रॉकेटों को हवा में ही नष्ट कर देता है।
विश्वास की बहाली: UAE के राष्ट्रपति के सलाहकार अनवर गरगाश के अनुसार, ईरान की आक्रामक नीतियों ने इजरायल के प्रभाव को इस क्षेत्र में बढ़ा दिया है।
ईरान के लिए संदेश: इजरायल और UAE का यह सैन्य गठजोड़ ईरान के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और सामरिक झटका है।
सुरक्षा सर्वोपरि: एक अमीराती अधिकारी ने साफ कहा कि मौजूदा संकट में जो भी देश उनकी जान-माल की रक्षा करेगा, उसके साथ सहयोग करने में उन्हें कोई हिचकिचाहट नहीं है।
बदल गया मध्य पूर्व का चेहरा
अबु धाबी और तेहरान के बीच दशकों पुराने संबंध अब विश्वास के संकट से गुजर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अबु धाबी अब अपनी सुरक्षा के लिए केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं रहना चाहता, इसीलिए वह इजरायल के साथ मिलकर एक 'रिजनल डिफेंस एलायंस' बनाने की ओर बढ़ रहा है।