मिडिल ईस्ट से बड़ी खबर: इजरायल और लेबनान के बीच 3 सप्ताह बढ़ा युद्धविराम, क्या अब ईरान से खत्म होगा तनाव
India News Live,Digital Desk : मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच शांति की एक बड़ी किरण दिखाई दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि इजरायल और लेबनान (हिजबुल्ला) के बीच जारी युद्धविराम को तीन सप्ताह (21 दिन) के लिए आगे बढ़ा दिया गया है। व्हाइट हाउस के 'ओवल ऑफिस' में हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद यह फैसला लिया गया। जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम न केवल इजरायल-लेबनान, बल्कि अमेरिका और ईरान के बीच भी सीधे संवाद का रास्ता खोल सकता है।
व्हाइट हाउस में हुई 'सार्थक' बैठक, ट्रंप बोले- हम शांति के करीब
ट्रंप ने ओवल ऑफिस में इजरायल और लेबनान के राजदूतों के साथ बैठक के बाद मीडिया को जानकारी दी। ट्रंप के साथ इस दौरान उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी मौजूद थे। ट्रंप ने कहा, "यह बैठक बेहद सार्थक रही। हमारा लक्ष्य लेबनान को हिजबुल्ला के प्रभाव से बचाना और इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।" उन्होंने यह भी संकेत दिए कि वह जल्द ही इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ आउन की मेजबानी वाशिंगटन में कर सकते हैं।
ईरान युद्ध के थमने के संकेत?
इजरायल और लेबनान के बीच युद्धविराम का बढ़ना कूटनीतिक नजरिए से बहुत अहम है। दरअसल, ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत के लिए 'इजरायल-लेबनान युद्धविराम' को एक प्रमुख शर्त के रूप में रखा था। 10 दिनों का शुरुआती युद्धविराम सोमवार को समाप्त होने वाला था, लेकिन अब इसके बढ़ने से अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे चरण की शांति वार्ता (Phase 2 Talks) की संभावना प्रबल हो गई है।
हिजबुल्ला का रुख और चुनौतियां
भले ही दोनों देश युद्धविराम पर सहमत हो गए हों, लेकिन जमीन पर चुनौतियां बरकरार हैं। ट्रंप ने स्वीकार किया कि उन्हें हिजबुल्ला की गतिविधियों पर भी ध्यान देना होगा, जो लगातार इस वार्ता का विरोध कर रहा है। पिछले शुक्रवार से अब तक कई बार युद्धविराम के उल्लंघन की खबरें भी आई हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इजरायल को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है और यदि उन पर हमला हुआ, तो वे जवाबी कार्रवाई करेंगे।
दशकों बाद सीधी राजनयिक वार्ता
यह पहली बार है जब इजरायल और लेबनान के बीच इस तरह की सीधी राजनयिक बातचीत हो रही है। इजरायल के राजदूत येचिएल लिटर ने ट्रंप के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही एक औपचारिक शांति समझौता (Peace Treaty) धरातल पर उतरेगा। अमेरिका का मुख्य जोर इस समय लेबनान की सेना को मजबूत करने पर है ताकि वह अपने क्षेत्र से हिजबुल्ला के प्रभाव को कम कर सके।