माघ मेला क्षेत्र में द्वारका शारदा पीठ शिविर का भूमि पूजन, संतों ने अरावली और बांग्लादेशी हिंदुओं को लेकर जताई चिंता
India News Live,Digital Desk : माघ मेला क्षेत्र में द्वारका शारदा पीठ के शिविर की स्थापना के लिए सोमवार सुबह वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भूमि पूजन संपन्न हुआ। यह आयोजन त्रिवेणी मार्ग सेक्टर चार में किया गया, जिसमें देशभर से आए संत, महंत और सनातन धर्म के विद्वान बड़ी संख्या में शामिल हुए।
श्री मनकामेश्वर महादेव मंदिर के महंत और पीठ प्रतिनिधि श्रीधरानंद ब्रह्मचारी के संयोजन में स्वामी शंकर स्वरूप ब्रह्मचारी ने विधिवत पूजन कराया। आचार्य विद्यकांत पांडेय और गंगा प्रसाद शुक्ल के नेतृत्व में 21 वैदिक ब्राह्मणों ने पूर्ण विधि-विधान के साथ अनुष्ठान कर माघ मेला के सफल आयोजन की कामना की।
भूमि पूजन के पश्चात संतों ने सनातन धर्म, राष्ट्र और पर्यावरण से जुड़े विषयों पर गंभीर चिंतन किया। महंत श्रीधरानंद ब्रह्मचारी ने अरावली पर्वतमाला पर मंडरा रहे खतरे और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि द्वारका शारदा पीठ के शिविर में अरावली पर्वतमाला की रक्षा और बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाएंगे। उन्होंने अरावली को भारत की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि इसके अस्तित्व को खतरा मानव, पशु-पक्षियों और पर्यावरण तीनों के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
श्रीधरानंद ने चेतावनी दी कि यदि आवश्यकता पड़ी तो अरावली की रक्षा के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा और माघ मेला के दौरान जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
श्रीमहानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत यमुना पुरी ने कहा कि अरावली के अस्तित्व से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए और सरकार को इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। वहीं निर्मल अखाड़ा के सचिव महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर केंद्र सरकार से कड़े कदम उठाने की मांग की।
हर्षचैतन्य ब्रह्मचारी (छोटे महाराज) ने स्पष्ट कहा कि अरावली के संरक्षण के मुद्दे पर कोई आदेश या निर्देश स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसकी सुरक्षा ही संत समाज का मुख्य उद्देश्य है।
इस अवसर पर महापौर गणेश केसरवानी सहित विद्या चैतन्य ब्रह्मचारी, लवकुश महाराज, स्वामी सदाशिव, अशोक पाठक, अनूप त्रिपाठी, आलोक पांडेय, डॉ. रामजी मिश्र, संजय मिश्र, धनंजय मिश्र और पंकज पांडेय समेत कई संत, विद्वान और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।