सावधान! भारत के कच्चे तेल के भंडार में 15% की बड़ी गिरावट, क्या सच में खत्म होने वाला है पेट्रोल-डीजल जानें क्या है जमीनी हकीकत
India News Live, Digital Desk : भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने नीति-निर्माताओं से लेकर आम जनता तक की चिंता बढ़ा दी है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) में लगभग 15% की कमी दर्ज की गई है। इस खबर के वायरल होते ही सोशल मीडिया और गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या देश के पास अब केवल कुछ ही दिनों का तेल बचा है? लोग पूछ रहे हैं कि क्या भारत के पास 60 दिन का बैकअप है या यह घटकर महज 18 दिन रह गया है।
आखिर क्यों घट रहा है भारत का ‘इमरजेंसी’ तेल कोटा
भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% हिस्सा आयात करता है। किसी भी युद्ध या वैश्विक संकट की स्थिति से निपटने के लिए भारत ने जमीन के नीचे बड़े-बड़े टैंकों में ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ बना रखे हैं। रिपोर्टों की मानें तो हाल के महीनों में रिफाइनिंग की बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव के बीच इस भंडार से तेल का इस्तेमाल किया गया है। 15 फीसदी की यह गिरावट इसलिए चिंताजनक है क्योंकि यह भारत की ‘एनर्जी बफर’ क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है।
60 दिन या 18 दिन: क्या है स्टॉक का असली गणित
तेल के स्टॉक को लेकर दो तरह के आंकड़े सामने आते हैं जो अक्सर भ्रम पैदा करते हैं। दरअसल, भारत के पास दो तरह के स्टॉक होते हैं। पहला ‘रणनीतिक भंडार’ (SPR), जो आपातकाल के लिए होता है और वर्तमान में यह लगभग 9 से 10 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है। दूसरा स्टॉक तेल कंपनियों (OMCs) के पास होता है, जो रिफाइनरियों और पाइपलाइनों में मौजूद रहता है और करीब 65 दिनों तक चल सकता है। जब रणनीतिक भंडार में 15% की कमी की बात आती है, तो इसका मतलब है कि देश की ‘अंतिम सुरक्षा दीवार’ थोड़ी पतली हुई है, हालांकि तेल कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक अभी भी राहत देने वाला है।
वैश्विक संकट के बीच भारत की नई रणनीति
दुनियाभर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर मिडिल-ईस्ट और रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति कभी भी बाधित हो सकती है। सरकार अब इस 15% की कमी को भरने और भंडार की क्षमता बढ़ाने के लिए दूसरे चरण (Phase-II) पर काम कर रही है। ओडिशा के चंडीखोल और कर्नाटक के पादुर में नए भंडार बनाने की योजना है ताकि भारत कम से कम 90 दिनों तक बिना किसी आयात के सुरक्षित रह सके। फिलहाल, घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन भंडार में आई यह कमी भविष्य के लिए एक बड़ी चेतावनी जरूर है।