Babri Masjid construction on hold : इंडो-इस्लामिक फाउंडेशन की अनिश्चितता बनी रोड़े
India News Live,Digital Desk : नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बाबरी मस्जिद की दावेदारी हमेशा के लिए खत्म हो गई थी। हालांकि, कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय के लिए दूसरी जगह मस्जिद बनाने के लिए जमीन देने का आदेश भी दिया था।
लेकिन करीब छह साल गुजर जाने के बावजूद यह मस्जिद अब तक नहीं बन पाई है। इसकी वजह है इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन की अनिश्चिता। फैसले के तुरंत बाद फाउंडेशन ने उत्साह जताया था, और माना गया कि नई मस्जिद राम मंदिर की तरह मुस्लिम समुदाय के लिए प्रतिष्ठापरक बनेगी।
आज यह उम्मीद धीरे-धीरे फीकी पड़ती दिख रही है। वही लोग, जिन्होंने मस्जिद बनाने की जिम्मेदारी उठाई थी, अब ढीले पड़ते जा रहे हैं।
फाउंडेशन के एक सदस्य ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि राम मंदिर के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण ने आसानी से सभी विभागों से एनओसी (No Objection Certificate) ले ली, जबकि मस्जिद के लिए फाउंडेशन को हर विभाग से एनओसी की दौड़ लगानी पड़ रही है।
शहीद शोध संस्थान के अध्यक्ष सूर्यकांत पांडेय का कहना है कि मस्जिद बनाने वाले ट्रस्ट को मंदिर निर्माण ट्रस्ट से प्रतिस्पर्धा की भावना में नहीं उलझना चाहिए। उन्हें अपनी भूमिका के प्रति ईमानदारी दिखाते हुए मस्जिद का मानचित्र मान्यता के लिए सभी आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराना चाहिए।
लेकिन इंडो-इस्लामिक फाउंडेशन लंबे समय से उदासीन दिख रहा है। विकास प्राधिकरण ने चार साल की कोशिश के बाद जब जनसूचना के तहत मांगी गई जानकारी दी और बताया कि मस्जिद का मानचित्र अस्वीकृत हो गया, तब भी फाउंडेशन ने कोई पहल नहीं की।
इसी बीच, बाबरी मस्जिद के समर्थक रहे स्थानीय मुस्लिम नेता हाजी महबूब ने भी भूमि की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कोर्ट ने मस्जिद अयोध्या की आंतरिक सीमा में बनाने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने यह जमीन अयोध्या से 20 किलोमीटर दूर, सोहावल तहसील के ग्राम धन्नीपुर में दी।
अब फाउंडेशन की ओर से बताया जा रहा है कि धन्नीपुर में मिली पांच एकड़ जमीन मस्जिद और अन्य सुविधाओं के लिए पर्याप्त नहीं है। इस वजह से उन्होंने पहले जमा किया गया नक्शा वापस ले लिया है।
वक्फ बोर्ड और सब कमेटी अयोध्या के अध्यक्ष आजम कादरी कहते हैं कि स्थानीय मुस्लिम समुदाय का इस मस्जिद में अब कोई खास रूचि नहीं है। उनका मानना है कि जब तक सरकार आगे नहीं आएगी, मस्जिद का निर्माण मुश्किल ही रहेगा।