Arrest of doctors averted two terrorist attacks : फरीदाबाद और हैदराबाद में बड़ा खुलासा, आईएसआईएस से कनेक्शन सामने आया
India News Live,Digital Desk : देश की सुरक्षा एजेंसियों ने इस हफ्ते दो बड़े आतंकी हमले होने से पहले ही उन्हें नाकाम कर दिया। फरीदाबाद और हैदराबाद में की गई कार्रवाई में तीन डॉक्टर गिरफ्तार हुए हैं — जिनके पास से भारी मात्रा में विस्फोटक, हथियार और जहर बनाने वाला रसायन बरामद किया गया है। जांच में खुलासा हुआ है कि इनमें से एक आरोपी का संबंध इस्लामिक स्टेट-खोरासान प्रांत (ISKP) से है।
फरीदाबाद में मिला 350 किलो विस्फोटक रसायन
रविवार रात जम्मू-कश्मीर पुलिस ने दिल्ली के पास फरीदाबाद में बड़ी कार्रवाई करते हुए 350 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद किया। यह वही रसायन है जिससे बड़े विस्फोट किए जा सकते हैं। इस मामले में दो डॉक्टर — आदिल अहमद और मुजम्मिल शकील — को गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, यह छापा उस खुफिया जानकारी के आधार पर मारा गया जो राठेर नाम के एक डॉक्टर ने दी थी। राठेर को श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जांच में पता चला कि फरीदाबाद के अल-फलाह अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर शकील के पास भारी मात्रा में गोला-बारूद, 20 टाइमर और दो असॉल्ट राइफलें थीं।
राठेर पिछले साल तक अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में कार्यरत था। पुलिस को कॉलेज में उसके लॉकर से एक और असॉल्ट राइफल मिली। फिलहाल यह जांच की जा रही है कि इतने बड़े पैमाने पर अमोनियम नाइट्रेट की सप्लाई कहां से हुई और इसे दिल्ली तक कैसे पहुंचाया गया।
हैदराबाद में ‘राइसिन जहर’ बनाने की साजिश
दूसरे मामले में, गुजरात एटीएस ने अहमद मोहियुद्दीन सैयद नाम के डॉक्टर को हैदराबाद से गिरफ्तार किया। वह खुद को चीन से मेडिकल डिग्री हासिल करने वाला बताता है। उसके पास से तीन पिस्तौल, 30 गोलियां और चार लीटर अरंडी का तेल बरामद किया गया — जिसे “राइसिन” नामक घातक ज़हर तैयार करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
गुजरात एटीएस के अधिकारियों के अनुसार, सैयद दिल्ली, लखनऊ या अहमदाबाद जैसे शहरों में किसी संवेदनशील जगह पर हमले की योजना बना रहा था। जांच में यह भी सामने आया कि उसका संबंध अफगानिस्तान स्थित आतंकी हैंडलर “अबू खादीजा” से था।
सैयद के दो साथियों — आजाद सुलेमान शेख और मोहम्मद सुहैल सलीम — को भी गिरफ्तार किया गया है। दोनों ने पूछताछ में कबूल किया कि उन्होंने पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए हथियार मंगवाए थे।
खुफिया एजेंसियां अलर्ट पर
दोनों घटनाओं के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। जांच में टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर सक्रिय कई विदेशी मॉड्यूल्स के साथ संपर्क के सबूत मिले हैं।
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि डॉक्टरों का इस तरह आतंकी गतिविधियों में शामिल होना बेहद चौंकाने वाला है। यह मामला दिखाता है कि आईएसकेपी जैसी आतंकी संगठन अब शिक्षित पेशेवरों को भी अपने नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।