Anshul Kamboj Stats IPL : CSK को मिला ब्रावो और पथिराना जैसा 'डेथ ओवर किंग'
India News Live, Digital Desk: आईपीएल (IPL) के इतिहास में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) की सफलता का एक बड़ा राज रहा है उनके पास मौजूद 'डेथ ओवर स्पेशलिस्ट' गेंदबाज। ड्वेन ब्रावो से लेकर मथीशा पथिराना तक, सीएसके ने हमेशा ऐसे गेंदबाज तराशे हैं जो अंतिम ओवरों में मैच पलट देते हैं। अब इस लिस्ट में एक नया नाम जुड़ गया है अंशुुल कंबोज (Anshul Kamboj)। हरियाणा के इस युवा तेज गेंदबाज ने अपनी घातक गेंदबाजी से न केवल विरोधियों को पस्त किया है, बल्कि खुद को पर्पल कैप (Purple Cap) की रेस में भी मजबूती से खड़ा कर लिया है।
लाल गेंद के जादूगर से सफेद गेंद के स्टार तक का सफर
अंशुुल कंबोज की कहानी 'रेड बॉल' क्रिकेट से शुरू हुई थी। हरियाणा के लिए घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी) में लाल गेंद से विकेट चटकाने वाले अंशुुल को शुरुआत में एक टेस्ट स्पेशलिस्ट के रूप में देखा जाता था। हालांकि, उनकी लंबाई और सटीक लाइन-लेंथ ने सीएसके के स्काउट्स का ध्यान खींचा। धोनी की टीम में शामिल होने के बाद, अंशुुल ने अपनी गेंदबाजी में जो बदलाव किए हैं, उसने उन्हें सफेद गेंद के क्रिकेट का 'खतरनाक हथियार' बना दिया है।
क्या है अंशुुल की गेंदबाजी का 'X-फैक्टर'?
विशेषज्ञों का मानना है कि अंशुुल के पास वह कला है जो सीएसके के पूर्व दिग्गज ड्वेन ब्रावो में थी।
सटीक यॉर्कर और स्लोअर बॉल: अंशुुल ने अपनी गति में बदलाव (Pace Variations) पर जबरदस्त काम किया है। उनकी स्लोअर बाउंसर बल्लेबाजों को चकमा देने में माहिर है।
दबाव में संयम: डेथ ओवरों में जब बल्लेबाज बड़े शॉट्स मारने की कोशिश करते हैं, तब अंशुुल की डॉट गेंदें फेंकने की क्षमता उन्हें खास बनाती है।
धोनी का मार्गदर्शन: टीम के साथ रहते हुए एमएस धोनी के इनपुट ने अंशुुल के गेम प्लान को और अधिक प्रभावी बनाया है।
पर्पल कैप के 'उत्तराधिकारी' क्यों कहे जा रहे हैं अंशुुल?
इस सीजन में अंशुुल कंबोज ने जिस तरह से बड़े-बड़े पावर हिटर्स को खामोश रखा है, उससे उन्हें पर्पल कैप का 'Heir Apparent' यानी उत्तराधिकारी माना जा रहा है। सीएसके की गेंदबाजी यूनिट में दीपक चाहर की इंजरी के बाद अंशुुल ने जिम्मेदारी को बखूबी संभाला है। उनकी विकेट लेने की क्षमता और कम इकोनॉमी रेट उन्हें इस रेस में सबसे आगे रखता है।
भविष्य की ओर: टीम इंडिया का दरवाजा खटखटा रहे हैं अंशुुल
आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद अब अंशुुल कंबोज भारतीय राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ताओं की रडार पर भी आ गए हैं। जिस तरह से उन्होंने खुद को 'रेड स्किन' (टेस्ट मानसिकता) से बाहर निकालकर टी20 क्रिकेट के अनुकूल ढाला है, वह उनकी मेहनत को दर्शाता है। क्रिकेट फैंस और सीएसके के चाहने वालों को उम्मीद है कि अंशुुल आने वाले मैचों में भी अपनी इस 'पर्पल' फॉर्म को जारी रखेंगे।