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May 12 2026 06:43 pm

'थलापति' विजय अपनी ही माता-पिता की शादी के गवाह थे, 6 साल की उम्र में चर्च में देखा था 'दूसरा विवाह'

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India News Live, Digital Desk : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में अपनी नई पार्टी तमिझगा वेत्री कड़गम (TVK) की बंपर जीत के साथ 'थलापति' विजय दक्षिण भारत की राजनीति के नए 'किंगमेकर' बनकर उभरे हैं। राजनीति में आए इस भूचाल के बीच विजय की निजी जिंदगी से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और भावुक किस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि विजय उन चुनिंदा लोगों में से हैं जिन्होंने अपने माता-पिता के विवाह को अपनी आंखों से देखा था।

6 साल के विजय और माता-पिता की 'दूसरी शादी'

विजय के पिता और मशहूर निर्देशक एस.ए. चंद्रशेखर ने अपने यूट्यूब चैनल पर इस राज से पर्दा उठाया था। उन्होंने बताया कि विजय केवल 6 साल के थे जब वे अपने माता-पिता की दूसरी शादी के गवाह बने थे।

दरअसल, एस.ए. चंद्रशेखर और उनकी पत्नी शोभा ने दो बार शादी की थी। पहली बार उन्होंने अलग-अलग धर्मों का होने के कारण सादगी से शादी की थी, लेकिन बाद में शोभा की इच्छा पर उन्होंने दोबारा ईसाई रीति-रिवाज से विवाह किया।

दो धर्मों का खूबसूरत संगम: 'कोई बंधन नहीं'

चंद्रशेखर ने बताया कि उनका परिवार किसी एक धर्म की बेड़ियों में नहीं बंधा है:

सर्वधर्म सद्भाव: चंद्रशेखर ईसाई हैं और शोभा हिंदू। उनके घर में चर्च की प्रार्थना भी होती है और मंदिर के दर्शन भी।

तिरुपति में मुंडन: चंद्रशेखर ने खुलासा किया कि उनका पूरा परिवार तिरुपति और वेलंकन्नी दोनों जगह जाकर मुंडन करवा चुका है।

एक ही नाव का सफर: शोभा ने एक बार चंद्रशेखर से कहा था कि वे अलग-अलग धर्मों का पालन कर रहे हैं, जो अलग-अलग नावों की तरह है। संकट आने पर वे अलग हो सकते हैं, इसलिए वे एक ही रीति-रिवाज (ईसाई) से दोबारा शादी करना चाहती थीं ताकि उनका आध्यात्मिक जुड़ाव एक हो सके।

1980 की वह शादी और विजय की मौजूदगी

साल 1980 में नुंगमबक्कम के एक चर्च में जब यह शादी हुई, तब विजय वहां मौजूद थे। चंद्रशेखर गर्व से कहते हैं, "विजय किसी से भी कह सकते हैं कि मेरे माता-पिता की शादी मेरी मौजूदगी में हुई थी।"

दिलचस्प बात यह है कि जब यह दूसरी शादी हो रही थी, तब शोभा दूसरी बार गर्भवती थीं। चंद्रशेखर इसे अपनी जिंदगी का 'सौभाग्य' मानते हैं क्योंकि इसी शादी के आसपास उन्हें अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'सत्तम ओरु इरुट्टाराई' को निर्देशित करने का मौका मिला था।

राजनीति में 'थलापति' का नया अध्याय

विजय की यह परवरिश, जहां धर्मों का कोई भेदभाव नहीं था, उनकी राजनीति में भी झलकती है। शायद यही वजह है कि 2026 के चुनावों में उन्हें हर वर्ग का समर्थन मिला है। अपनी जड़ों और परिवार के प्रति विजय का यह जुड़ाव ही उन्हें अपने फैंस के बीच इतना लोकप्रिय बनाता है।