ईरान युद्ध के बीच अमेरिका का बड़ा सैन्य फैसला: वियतनाम युद्ध के बाद भर्ती प्रणाली में सबसे बड़ा सुधार, अब होगा 'ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन'

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी भीषण तनाव और युद्ध की आशंकाओं के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य शक्ति को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। दशकों बाद अमेरिका अपनी सैन्य भर्ती प्रणाली (Military Draft System) में आमूलचूल बदलाव करने जा रहा है। नए प्रस्ताव के तहत अब अमेरिकी पुरुषों का सैन्य सेवा के लिए 'ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन' किया जाएगा, जिसे वियतनाम युद्ध के बाद का सबसे महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है।

क्या है नया नियम और कब होगा लागू?

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का सेलेक्टिव सर्विस सिस्टम (SSS) दिसंबर 2026 तक इस ऑटोमैटिक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरी तरह लागू करने की तैयारी में है।

जिम्मेदारी का हस्तांतरण: अब तक 18 से 25 वर्ष के युवाओं को खुद अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होती थी। अब यह जिम्मेदारी युवाओं से हटकर सीधे सरकारी एजेंसी पर आ जाएगी।

NDAA 2026 का हिस्सा: यह बदलाव 'राष्ट्रीय रक्षा प्राधिकरण अधिनियम' (NDAA) के तहत किया गया है। इसके जरिए संघीय डेटाबेस (Federal Database) को एकीकृत किया जाएगा, जिससे पात्र पुरुषों का नाम सीधे ड्राफ्ट डेटाबेस में जुड़ जाएगा।

पुरानी व्यवस्था बनाम नई व्यवस्था

वर्तमान में 18 से 25 वर्ष के अमेरिकी पुरुषों को अपने 18वें जन्मदिन के 30 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है। ऐसा न करने पर भारी जुर्माना, जेल और सरकारी नौकरियों या लाभों से वंचित होने का प्रावधान है। हालांकि कई राज्यों में ड्राइवर लाइसेंस बनवाते समय यह पंजीकरण जुड़ा हुआ था, लेकिन अब नई व्यवस्था इसे पूरे देश में 'डिफ़ॉल्ट' बना देगी। इससे सरकारी संसाधनों की बचत होगी और सिस्टम का आधुनिकीकरण होगा।

ईरान युद्ध के बीच रणनीतिक तैयारी

यद्यपि अमेरिका में वियतनाम युद्ध के बाद से अनिवार्य सैन्य भर्ती (Mandatory Draft) नहीं हुई है, लेकिन ईरान के साथ बढ़ते वैश्विक संघर्ष और संभावित परमाणु खतरे ने पेंटागन को भविष्य की तैयारियों के लिए मजबूर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम किसी भी आपातकालीन स्थिति में सेना की संख्या को तेजी से बढ़ाने के लिए उठाया गया है।

ट्रंप की चेतावनी: "समझौता लागू होने तक तैनात रहेंगे युद्धपोत"

एक तरफ भर्ती नियमों में बदलाव हो रहा है, तो दूसरी तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक ईरान के साथ होने वाला समझौता पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर जाता, तब तक अमेरिकी सेना पीछे नहीं हटेगी।

सैन्य घेराबंदी जारी: ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा कि अमेरिकी युद्धपोत, घातक विमान, अतिरिक्त गोला-बारूद और सैनिक ईरान के आसपास डटे रहेंगे।

आर-पार की जंग की धमकी: ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने समझौते का पालन नहीं किया, तो अगली सैन्य कार्रवाई पहले से कहीं अधिक "विनाशकारी और ताकतवर" होगी।

दो टूक संदेश: अमेरिका ने दोहराया है कि वह ईरान को कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को हर हाल में सुरक्षित और खुला रखेगा।