अमेरिका ने लश्कर-ए-तैयबा की प्रॉक्सी शाखाओं पर कसा शिकंजा, भारत की कूटनीतिक जीत
India News Live,Digital Desk : भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है , जब अमेरिकी सरकार ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) की शाखा द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल कर दिया है। अमेरिका ने टीआरएफ को लश्कर-ए-तैयबा का ही एक हिस्सा माना है। टीआरएफ के अलावा, अमेरिकी सरकार ने लश्कर-ए-तैयबा के दो अन्य उपनामों - कश्मीर रेजिस्टेंस फ्रंट (केआरएफ) और कश्मीर रेजिस्टेंस - को भी लश्कर-ए-तैयबा का हिस्सा मानकर प्रतिबंधित कर दिया है।
अमेरिका का फैसला: लश्कर-ए-तैयबा के नए चेहरों का सामना
एबीपी न्यूज़ को प्राप्त अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के आधिकारिक आदेश की एक विशेष प्रति के अनुसार, अमेरिकी संघीय सार्वजनिक रजिस्टर में प्रकाशित आदेश में कहा गया है कि लश्कर-ए-तैयबा का विदेशी आतंकवादी संगठन (FTO) और विशेष रूप से नामित वैश्विक आतंकवादी (SDGT) का दर्जा अमेरिका में बरकरार रहेगा। इसके नए संगठनों - द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF), कश्मीर रेजिस्टेंस फ्रंट (KRF), और कश्मीर रेजिस्टेंस - को अब इस सूची में जोड़ा जा रहा है।
यह निर्णय अमेरिकी आव्रजन एवं राष्ट्रीयता अधिनियम की धारा 219 और कार्यकारी आदेश 13224 के तहत लिया गया है। इस आदेश के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा पर लागू होने वाले वही आर्थिक और कानूनी प्रतिबंध अब उसके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले इन नए नामों (टीआरएफ, केआरएफ और कश्मीर रेजिस्टेंस) पर भी लागू होंगे।
भारत की जीत , पाकिस्तान की हार
एबीपी न्यूज़ के पास उपलब्ध एक्सक्लूसिव दस्तावेजों के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने अमेरिकी अटॉर्नी जनरल और ट्रेजरी सचिव से परामर्श के बाद 2 जुलाई, 2025 को यह निर्णय लिया, जिसे आज, 18 जुलाई, 2025 को 'फेडरल रजिस्टर' में आधिकारिक रूप से प्रकाशित किया गया।
अमेरिका का यह फैसला भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत है, क्योंकि अमेरिका ने इन तीनों संगठनों को अलग-अलग आतंकवादी संगठनों के रूप में नहीं, बल्कि लश्कर-ए-तैयबा के छद्म या प्रॉक्सी के रूप में मान्यता दी है। यह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत भी हमेशा से टीआरएफ, केआरएफ और कश्मीर रेजिस्टेंस को लश्कर-ए-तैयबा का हिस्सा मानता रहा है। अमेरिका ने इस मामले में भारत के रुख को अपनाया है।
इन संगठनों को लश्कर-ए-तैयबा का हिस्सा बताकर आतंकवादी सूची में डालने का अमेरिकी आदेश पाकिस्तान के लिए एक बड़ी हार है। पाकिस्तान लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि टीआरएफ एक आतंकवादी संगठन है या लश्कर-ए-तैयबा का हिस्सा है। पाकिस्तान ने तो यूएनएससी के बयान में पहलगाम आतंकवादी हमले में टीआरएफ के ज़िक्र का भी खुलकर विरोध किया था और टीआरएफ का नाम हटवा दिया था।
लश्कर की कार्यप्रणाली और सज्जाद गुल
टीआरएफ, केआरएफ और कश्मीर रेजिस्टेंस, दोनों ही आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के उपनाम हैं। लश्कर-ए-तैयबा ने आतंकवादी सज्जाद गुल को टीआरएफ, केआरएफ और कश्मीर रेजिस्टेंस का कमांडर बनाया है। सज्जाद गुल 2018 से पाकिस्तान में छिपा हुआ है और एनआईए ने उस पर ₹10 लाख का इनाम रखा है। सूत्रों के अनुसार, सज्जाद गुल वर्तमान में पाकिस्तान के रावलपिंडी में रहता है।
लश्कर-ए-तैयबा ने भारत में आतंकवादी हमलों की ज़िम्मेदारी लेने के लिए टीआरएफ नाम से अपना एक अलग आतंकवादी संगठन बनाया था। इसी तरह, पिछले दो सालों में, लश्कर ने टीआरएफ जैसे दो और आतंकवादी संगठन बनाए हैं - कश्मीर रेजिस्टेंस फ्रंट और कश्मीर रेजिस्टेंस - जिनके अलग-अलग उपनाम हैं, और जिनका काम सिर्फ़ हमलों की ज़िम्मेदारी लेना था। लश्कर-ए-तैयबा ने पहलगाम हमले की ज़िम्मेदारी भी टीआरएफ और कश्मीर रेजिस्टेंस नाम से ली थी। अमेरिका के इस फ़ैसले से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी संगठनों की इस तरह की पर्दा डालने की रणनीति पर लगाम लगेगी।