धर्म और जाति के बाद अब 'Age' पर देश को बांटने की साजिश: स्मृति ईरानी ने क्यों कही यह बात
देश के समकालीन राजनीतिक परिदृश्य में युवा विमर्श, पीढ़ीगत बदलाव और सोशल मीडिया आंदोलनों को लेकर छिड़ी तीखी बहसों के बीच भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का एक बड़ा और बेहद आक्रामक बयान सामने आया है। एक सार्वजनिक परिचर्चा के दौरान विपक्षी दलों की रणनीतियों पर सीधा हमला बोलते हुए स्मृति ईरानी ने आरोप लगाया कि देश के राजनीतिक विमर्श में विभाजन की एक नई और खतरनाक पटकथा लिखी जा रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जब कुछ राजनीतिक ताकतें धर्म और जाति के आधार पर समाज को विभाजित करने में विफल हो गईं, तो अब वे 'आयु' (Age/Generational Divide) के नाम पर युवाओं और पुरानी पीढ़ी के बीच टकराव पैदा कर देश को बांटने का सुनियोजित प्रयास कर रही हैं।
स्मृति ईरानी ने क्यों कही यह बात: बयानों के पीछे का संदर्भ
स्मृति ईरानी के इस तीखे बयान का मुख्य संदर्भ देश में हाल के दिनों में उभरे 'जेन-जी' (Gen-Z) आधारित राजनीतिक अभियानों, सोशल मीडिया ट्रेंड्स और विपक्ष द्वारा युवाओं को पारंपरिक सामाजिक ढांचे के खिलाफ खड़ा करने की कोशिशों से जुड़ा है।
उन्होंने राजनीतिक विश्लेषकों और नेताओं को आगाह करते हुए कहा:
विभाजनकारी नैरेटिव का विस्तार: "लंबे समय तक इस देश को कभी धर्म तो कभी जातियों और उप-जातियों के खांचों में बांटकर सियासी रोटियां सेंकने का खेल चला। जब जनता ने विकास और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर इन संकीर्ण दीवारों को तोड़ना शुरू किया, तो अब एक नया प्रयोग शुरू किया गया है—उम्र और पीढ़ीगत खाई का। यह नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी की दुश्मन है और बुजुर्गों की सोच आज के भारत की आकांक्षाओं के रास्ते में रोड़ा है।"
संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों पर हमला: पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत की मूल ताकत उसका संयुक्त पारिवारिक ढांचा और पीढ़ियों के बीच का परस्पर सम्मान रहा है। यदि उम्र के आधार पर युवाओं को उनके बड़ों और सामाजिक संस्थाओं के खिलाफ भड़काया जाएगा, तो यह समाज के ताने-बाने को भीतर से कमजोर कर देगा।
'Gen-Z' और युवा राजनीति पर विपक्ष को घेरा
हाल के महीनों में विपक्षी दलों ने छात्र राजनीति, बेरोजगारी के प्रदर्शनों और डिजिटल अभियानों में खुद को युवाओं (विशेषकर 18 से 25 वर्ष के Gen-Z समूह) का एकमात्र प्रतिनिधि साबित करने का आक्रामक प्रयास किया है।
स्मृति ईरानी ने इसी रणनीति को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
राजनीतिक इस्तेमाल का औजार: उन्होंने कहा कि विपक्ष युवाओं की वास्तविक आकांक्षाओं, स्किलिंग और रोजगार की चिंता करने के बजाय उन्हें केवल आंदोलनकारी भीड़ और वोटबैंक के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है।
सहानुभूति बनाम समाधान: जब भी कोई वैश्विक या राष्ट्रीय संकट आता है, तो विपक्ष युवाओं में निराशा (Cynicism) और व्यवस्था के प्रति अविश्वास भरने की कोशिश करता है, यह दिखाने के लिए कि मौजूदा व्यवस्था केवल पुरानी पीढ़ी के अनुकूल है और युवाओं के लिए इसमें कोई जगह नहीं है।
डिजिटल विभाजन की राजनीति: उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया एल्गोरिदम और प्रायोजित अभियानों के जरिए पीढ़ियों के बीच कृत्रिम तनाव और संवादहीनता को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि एक असंतुष्ट और भड़काऊ माहौल तैयार किया जा सके।
क्या कहता है भारत का जनसांख्यिकी संतुलन?
भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे युवा देश है, जहां की 65 प्रतिशत से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। स्मृति ईरानी ने रेखांकित किया कि यह जनसांख्यिकी लाभांश (Demographic Dividend) देश के लिए एक वरदान है, न कि पीढ़ियों के संघर्ष का अखाड़ा।
उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों का हवाला देते हुए कहा:
स्टार्टअप और डिजिटल इंडिया: सरकार ने 'स्टार्टअप इंडिया', 'मुद्रा योजना' और कौशल विकास के जरिए देश के युवाओं को जॉब-सीकर (नौकरी मांगने वाले) से जॉब-क्रिएटर (रोजगार देने वाला) बनाया है।
अनुभव और युवा ऊर्जा का मेल: राष्ट्र का निर्माण तब होता है जब बुजुर्गों का मार्गदर्शन और अनुभव युवाओं की आधुनिक सोच और ऊर्जा के साथ मिलकर काम करे। अगर अनुभव को दरकिनार कर दिया जाए या युवाओं को केवल आक्रामक प्रतिरोध का चेहरा बना दिया जाए, तो दोनों का नुकसान होगा।
राजनीतिक हलकों में बयान की गूंज
स्मृति ईरानी के इस वक्तव्य के बाद राजनीतिक गलियारों में एक नई वैचारिक बहस छिड़ गई है। जहां भाजपा समर्थकों और समाजशास्त्रियों के एक बड़े वर्ग ने उनके इस बयान को सामाजिक सामंजस्य की दृष्टि से बेहद सटीक और समयोचित करार दिया है, वहीं विपक्षी दलों का तर्क है कि युवा वर्ग बेरोजगारी, पेपर लीक और भविष्य की अनिश्चितताओं को लेकर अपने बुनियादी अधिकारों की आवाज उठा रहा है, जिसे 'पीढ़ीगत टकराव' का नाम देकर खारिज नहीं किया जा सकता।
बहरहाल, स्मृति ईरानी के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में भारतीय राजनीति का एक बड़ा मोर्चा 'युवा बनाम व्यवस्था' और 'पीढ़ियों के संतुलन' के नैरेटिव पर भी लड़ा जाएगा।