सोने-चांदी के बाद अब तांबा और एल्यूमीनियम महंगे, 2026 में बढ़ेंगे घरेलू उत्पादों के दाम

Post

India News Live,Digital Desk : वर्ष 2025 में सोने और चांदी की कीमतों में उछाल ने निवेशकों को खुश कर दिया था, लेकिन अब आम जनता के लिए चिंताजनक खबर है। वर्ष 2026 में एल्युमीनियम और तांबे जैसी औद्योगिक धातुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। इन दोनों धातुओं की कीमतों में इस तीव्र वृद्धि का सीधा असर आपके घरेलू बजट पर पड़ेगा । रसोई के बर्तनों से लेकर एयर कंडीशनर तक, सब कुछ महंगा होने वाला है।

सोने और चांदी के बाद, अब तांबे और एल्यूमीनियम की बारी है।

वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है। पिछले तीन वर्षों में पहली बार एल्युमीनियम की कीमतें 3,000 अमेरिकी डॉलर प्रति टन के पार पहुंच गई हैं। वहीं दूसरी ओर, तांबे की कीमतें भी रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं। लंदन मेटल एक्सचेंज में तांबे की कीमतें 12,000 अमेरिकी डॉलर प्रति टन से ऊपर कारोबार कर रही हैं। इन बढ़ती कीमतों के कारण विनिर्माण कंपनियों की लागत बढ़ रही है, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

मूल्य वृद्धि के मुख्य कारण

इन धातुओं की कीमतों में अचानक आई तेजी के लिए कई वैश्विक कारक जिम्मेदार हैं:

आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान: चीन में धातु गलाने की क्षमता पर प्रतिबंध और यूरोप में बिजली की उच्च कीमतों के कारण एल्युमीनियम उत्पादन में गिरावट आई है।

खनन संबंधी समस्याएं: खनन से संबंधित दुर्घटनाओं और व्यवधानों ने तांबा उत्पादन के लिए प्रसिद्ध देशों, जैसे इंडोनेशिया, चिली और कांगो में आपूर्ति को बाधित कर दिया है।

निकल उत्पादन में कटौती: दुनिया के सबसे बड़े निकल उत्पादक इंडोनेशिया ने उत्पादन कम करने की योजना बनाई है, जिससे स्थिति और भी बिगड़ गई है।

इससे आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा?

इन धातुओं की कीमतों में वृद्धि से रोजमर्रा की चीजें महंगी हो जाएंगी। विशेष रूप से घरेलू उपकरण बनाने वाली कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी के लिए तैयार हो रही हैं।

एयर कंडीशनर (एसी), रेफ्रिजरेटर और अन्य शीतलन उत्पादों में तांबे का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

रसोई के बर्तन, कुकर और बाथरूम के फिटिंग महंगे होंगे।

एमसीएक्स पर तांबे की कीमतें 1,300 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई हैं।

कंपनियां अपने मुनाफे को बनाए रखने के लिए उत्पादों की कीमतों में 5% से 8% तक की वृद्धि कर सकती हैं।

विशेषज्ञों का अनुमान है: 2026 में मुद्रास्फीति उच्च बनी रहेगी।

गोल्डमैन सैक्स नामक प्रतिष्ठित संस्थान की एक रिपोर्ट के अनुसार, धातुओं की बढ़ती मांग और हरित ऊर्जा एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षेत्रों में वैश्विक निवेश के कारण कीमतें ऊंची बनी रहेंगी। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि 2026 के पहले छह महीनों तक तांबे और एल्युमीनियम की कीमतों में कोई बड़ी राहत मिलने की संभावना नहीं है। परिणामस्वरूप, उपभोक्ताओं को इस मुद्रास्फीति का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।