अयोध्या के बाद अब बंगाल में राम मंदिर की तैयारी, नदिया में 100 करोड़ से बनेगा ‘बंगाली राम’ का धाम

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India News Live,Digital Desk : अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी राम मंदिर की एक नई परिकल्पना साकार होने जा रही है। बंगाल के नदिया जिले के शांतिपुर में विशाल राम मंदिर के निर्माण की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस मंदिर का निर्माण ‘श्री कृतिवास राम मंदिर ट्रस्ट’ के माध्यम से किया जाएगा और इसकी थीम ‘बंगाली राम’ रखी गई है।

यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं होगा, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को भी प्रमुख रूप से सामने लाएगा।

कृतिवास ओझा की स्मृति में साकार होगी ‘बंगाली राम’ की अवधारणा

इस मंदिर की संकल्पना 15वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि कृतिवास ओझा के सम्मान में की गई है। कृतिवास ओझा ने संस्कृत रामायण का बंगाली अनुवाद ‘श्री राम पांचाली’ के रूप में किया था, जिसे आज भी बंगाल के घर-घर में पढ़ा जाता है।

ट्रस्ट का कहना है कि यह मंदिर भगवान राम को बंगाल की लोकसंस्कृति, भाषा और भावनात्मक परंपरा से जोड़ने का प्रयास होगा। इसी कारण इसे ‘बंगाली राम’ की पहचान दी जा रही है।

‘हरा राम’ की सांस्कृतिक पहचान को मिलेगा नया स्वरूप

श्री कृतिवास राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और भाजपा विधायक अरिंदम भट्टाचार्य के अनुसार, कृतिवास ओझा ने भगवान राम को बंगाल की सांस्कृतिक भूमि से जोड़ा था। बंगाल में राम को ‘हरा राम’ के रूप में भी जाना जाता है, जो यहां की लोक परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं का हिस्सा रहा है। प्रस्तावित मंदिर इसी सांस्कृतिक पहचान को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करेगा।

15 बीघा जमीन, 100 करोड़ का बजट और 2028 का लक्ष्य

यह राम मंदिर लगभग 15 बीघा भूमि पर बनाया जाएगा। यह जमीन स्थानीय निवासी लिटन भट्टाचार्य और पूजा बनर्जी द्वारा दान की गई है। मंदिर निर्माण के लिए करीब 100 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।

रविवार को ट्रस्ट के सदस्यों ने भूमि का अंतिम सर्वेक्षण पूरा कर लिया है, जिसके बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। ट्रस्ट का लक्ष्य है कि वर्ष 2028 तक मंदिर का निर्माण पूरा कर लिया जाए।

मंदिर निर्माण के साथ बंगाल की राजनीति में हलचल

राम मंदिर निर्माण की घोषणा के साथ ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी हलचल तेज हो गई है। भाजपा विधायक अरिंदम भट्टाचार्य ने साफ कहा है कि यह कोई चुनावी परियोजना नहीं है और इस पर वर्ष 2017 से काम चल रहा है। उन्होंने राज्य सरकार समेत सभी वर्गों से सहयोग की अपील की है।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इस परियोजना पर सवाल उठाए हैं। टीएमसी नेता जयप्रकाश मजूमदार ने इसे भाजपा का राजनीतिक स्टंट बताते हुए विधायक पर निशाना साधा है।

धार्मिक परियोजना या राजनीतिक संदेश, बहस जारी

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की प्रतिकृति की आधारशिला रखने की खबरें भी चर्चा में रही थीं। ऐसे में शांतिपुर में प्रस्तावित राम मंदिर को लेकर धार्मिक आस्था के साथ-साथ राजनीतिक संदेशों पर भी बहस तेज होती दिख रही है।