8th Pay Commission : पेंशन और भत्तों में हो सकता है बड़ा बदलाव, कर्मचारियों को करना होगा थोड़ा इंतजार
India News Live,Digital Desk : केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा तेज हो गई है, हालांकि सरकार ने अभी तक इस आयोग के गठन या इसकी शर्तों (ToR) को औपचारिक रूप से घोषित नहीं किया है। इसके बावजूद, उम्मीद की जा रही है कि इस बार वेतन के साथ-साथ भत्तों में भी अहम बदलाव हो सकते हैं।
आमतौर पर वेतन आयोग के गठन से लेकर उसकी सिफारिशों को लागू करने में 18 से 24 महीने का समय लगता है। ऐसे में 2026 की शुरुआत से पहले कोई बड़ा बदलाव देखना मुश्किल लग रहा है।
पेंशनभोगियों के मेडिकल भत्ते में वृद्धि का प्रस्ताव
11 मार्च 2025 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित SCOVA (पेंशनभोगियों की स्थायी समिति) की 34वीं बैठक में पेंशनभोगियों के लिए चिकित्सा भत्ते को ₹1,000 से बढ़ाकर ₹3,000 करने का प्रस्ताव पास हुआ। यह प्रस्ताव लंबे समय से पेंशनभोगियों की मांग रहा है, खासकर बढ़ती महंगाई और चिकित्सा खर्चों को देखते हुए।
यह संशोधित भत्ता 1 जनवरी 2026 से लागू किया जा सकता है, बशर्ते इसे 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में शामिल किया जाए।
एचआरए और अन्य भत्तों की नए ढांचे पर चर्चा
बैठक में यह भी बताया गया कि 8वां वेतन आयोग केवल मूल वेतन तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस), टीए (यात्रा भत्ता), डीए (महंगाई भत्ता) और मेडिकल भत्तों की भी नए सिरे से समीक्षा की जाएगी।
संभावना जताई जा रही है कि मेट्रो शहरों में एचआरए की दरें अधिक हो सकती हैं, वहीं ग्रामीण व अर्ध-शहरी क्षेत्रों में यात्रा भत्तों की गणना अलग तरीके से हो सकती है। साथ ही, कुछ पुराने और अप्रचलित भत्तों को समाप्त करने पर भी विचार किया जा रहा है, जिससे व्यवस्था अधिक पारदर्शी और सरल बने।
फिटमेंट फैक्टर और डीए विलय पर भी चर्चा
7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था, जिससे न्यूनतम वेतन ₹18,000 तय हुआ था। अब यह चर्चा है कि इसे बढ़ाकर 3.0 किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो न्यूनतम वेतन ₹27,000 तक पहुंच सकता है और पेंशन राशि ₹25,000 के आसपास तय हो सकती है।
इसके अलावा, डीए (महंगाई भत्ता) को मूल वेतन में समाहित करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है। इससे कुल वेतन पर तत्काल असर नहीं पड़ेगा, लेकिन भविष्य में डीए की वृद्धि की गति धीमी हो सकती है।
सरकार की घोषणा का इंतजार
फिलहाल आयोग का गठन और उसकी शर्तों को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। ऐसे में 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना पर भी संशय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं कि वह कब इस संबंध में कोई ठोस घोषणा करती है।