समंदर की गहराई में दौड़ती है आपके इंटरनेट की रफ्तार, जानें कैसे पलक झपकते ही सात समंदर पार पहुंच जाता है डेटा
India News Live,Digital Desk : आज के डिजिटल युग में हम एक क्लिक पर दुनिया के किसी भी कोने से जुड़ जाते हैं। चाहे दोस्तों के साथ वीडियो कॉल हो या हाई-डेफिनिशन मूवी की स्ट्रीमिंग, सब कुछ सेकंडों में हो जाता है। अक्सर हमें लगता है कि यह सारा खेल अंतरिक्ष में घूम रहे सैटेलाइट्स का है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि इंटरनेट का 95 प्रतिशत से ज्यादा ट्रैफिक आसमान से नहीं, बल्कि समंदर की अथाह गहराइयों से होकर गुजरता है। समुद्र के नीचे बिछा यह केबल्स का मायाजाल ही है, जो पूरी दुनिया को डिजिटल डोर से बांधे हुए है।
इंसानी बाल जैसे पतले धागों में छिपी है सुपरफास्ट स्पीड
समुद्र की तलहटी में बिछी इन 'सबमरीन कम्युनिकेशन केबल्स' की बनावट किसी इंजीनियरिंग अजूबे से कम नहीं है। बाहर से देखने पर ये किसी मोटे पाइप जैसी नजर आती हैं, लेकिन इनके भीतर मानव बाल जितने पतले फाइबर ऑप्टिक्स के बंडल होते हैं। इन्हीं महीन कांच के तंतुओं (फाइबर) के जरिए आपका डेटा बिजली की तरह नहीं, बल्कि प्रकाश की गति से सफर करता है। जब आप कोई मैसेज भेजते हैं, तो वह लेजर लाइट की तरंगों में बदल जाता है और लगभग 200,000 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से आगे बढ़ता है।
क्यों लगाए जाते हैं हर 100 किमी पर रिपीटर?
इंटरनेट डेटा को हजारों किलोमीटर का सफर तय करना होता है। इतनी लंबी दूरी तय करने के दौरान प्रकाश की तीव्रता (Signal Strength) धीरे-धीरे कम होने लगती है। इस समस्या से निपटने के लिए समुद्र के नीचे हर 50 से 100 किलोमीटर की दूरी पर 'रिपीटर' लगाए जाते हैं। ये रिपीटर कमजोर पड़ते सिग्नल्स को फिर से ऊर्जा देते हैं और उन्हें बूस्ट करते हैं, ताकि सात समंदर पार भी डेटा बिना किसी देरी (Latency) के अपने गंतव्य तक पहुंच सके।
सैटेलाइट से कई गुना बेहतर है यह केबल नेटवर्क
स्पीड और स्थिरता के मामले में सबमरीन केबल का कोई मुकाबला नहीं है। एक अकेली केबल सैकड़ों टेराबिट प्रति सेकंड (Tbps) की रफ्तार से डेटा ट्रांसफर करने में सक्षम होती है। यही वजह है कि लाखों लोग एक साथ बिना बफरिंग के 4K वीडियो देख पाते हैं। सैटेलाइट इंटरनेट की तुलना में यह तकनीक इसलिए बेहतर है क्योंकि इसमें सिग्नल को अंतरिक्ष तक जाने और वापस आने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता, जिससे इंटरनेट की लेटेन्सी बहुत कम रहती है।
भारत के इन शहरों में हैं इंटरनेट के 'प्रवेश द्वार'
भारत के लिए ये समुद्री केबल किसी जीवन रेखा से कम नहीं हैं। हमारे देश में मुंबई, चेन्नई और कोच्चि जैसे प्रमुख तटीय शहर इन केबलों के 'लैंडिंग स्टेशन' के रूप में काम करते हैं। समुद्र से निकलकर ये केबल इन्हीं स्टेशनों पर जमीन से जुड़ती हैं और फिर देश भर में बिछे फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क के जरिए आपके स्मार्टफोन या लैपटॉप तक इंटरनेट पहुंचाती हैं। अगर समुद्र के नीचे इन केबलों में कोई बड़ी तकनीकी खराबी आ जाए, तो पूरे देश की डिजिटल रफ्तार पर ब्रेक लग सकता है।