World Offline Risk: क्या ठप हो जाएगा पूरी दुनिया का इंटरनेट? ईरान की इस खौफनाक धमकी ने उड़ाई वैश्विक संस्थाओं की नींद
India News Live,Digital Desk : रूस-यूक्रेन और इजरायल-हमास संघर्ष के बीच अब एक नया और भयावह खतरा मंडराने लगा है। यह खतरा सिर्फ मिसाइलों या टैंकों का नहीं, बल्कि 'डिजिटल ब्लैकआउट' का है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़ी समाचार एजेंसी 'तसनीम' की एक हालिया रिपोर्ट ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। ईरान ने अब समुद्र के नीचे बिछी उन 'सबमरीन इंटरनेट केबल्स' को निशाना बनाने की धमकी दी है, जो वैश्विक संचार की लाइफलाइन हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य: जहां से गुजरता है दुनिया का डेटा
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को अब तक केवल कच्चे तेल और गैस की सप्लाई के लिए एक महत्वपूर्ण 'चेकपॉइंट' माना जाता था। लेकिन ईरान की नई धमकी ने इसके सामरिक महत्व को और बढ़ा दिया है। यह संकरा समुद्री मार्ग संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों को इंटरनेट से जोड़ने वाली केबलों का प्रमुख गलियारा है। रिपोर्ट में सीधे तौर पर कहा गया है कि इन केबलों और लैंडिंग स्टेशनों को युद्ध के दौरान 'प्रेशर पॉइंट' (दबाव बनाने का जरिया) के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
कितना आसान है इंटरनेट केबल को काटना?
समुद्र के नीचे बिछी इन केबलों की सुरक्षा को लेकर विशेषज्ञ लंबे समय से चिंतित हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में कई जगहों पर समुद्र की गहराई मात्र 200 फीट है। इतनी कम गहराई पर बिछी केबलों तक पहुंचना किसी भी आधुनिक सेना या ड्रोन के लिए बेहद आसान है। अगर ईरान इन केबलों को जानबूझकर या अनजाने में नुकसान पहुंचाता है, तो खाड़ी देशों समेत एशिया और यूरोप के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप हो सकती हैं।
डिजिटल ढांचे पर पहले भी हो चुके हैं हमले
ईरान की इस धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता क्योंकि युद्ध के दौरान पहले भी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा चुका है। बताया जा रहा है कि हालिया ड्रोन हमलों में संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन स्थित अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) के केंद्रों को नुकसान पहुंचा था। अब अगर समुद्र के नीचे की केबलों को काटा गया, तो न केवल बैंकिंग और संचार व्यवस्था चरमरा जाएगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी अरबों डॉलर का झटका लगेगा।
मरम्मत में आ सकती है बड़ी बाधा
अगर युद्ध की स्थिति में इन केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो उन्हें ठीक करना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। समुद्र के बीचों-बीच केबल ठीक करने वाले जहाजों (Cable repair ships) का वहां पहुंचना खतरे से खाली नहीं होगा। ऐसे में दुनिया के एक बड़े हिस्से को हफ्तों या महीनों तक 'ऑफलाइन' रहना पड़ सकता है। ईरान का यह रुख अब तकनीकी समझौते से कहीं ज्यादा एक 'डिजिटल युद्ध' की सीधी चेतावनी माना जा रहा है।