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November 06 2026 09:54 am

स्मार्टफोन होंगे सस्ते? मोबाइल कंपनियों ने सरकार से की GST 18% से घटाकर 5% करने की मांग

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भारत में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों और नया मोबाइल खरीदने की योजना बना रहे करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। देश में मोबाइल हैंडसेट की बढ़ती कीमतों और घरेलू मांग में आई सुस्ती के बीच स्मार्टफोन कंपनियों ने केंद्र सरकार के सामने एक बड़ी मांग रख दी है। भारत के मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष संस्था 'इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन' (ICEA)—जिसमें ऐपल (Apple), शाओमी (Xiaomi), ओप्पो (Oppo), वीवो (Vivo) और लावा (Lava) जैसे दिग्गज ब्रांड्स शामिल हैं—ने सरकार से मोबाइल फोन पर लगने वाले जीएसटी (GST) को मौजूदा 18 फीसदी से घटाकर सीधे 5 फीसदी करने की औपचारिक अपील की है।

इंडस्ट्री बॉडी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजकर इस प्रस्ताव को आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक के एजेंडे में शामिल करने का आग्रह किया है। यदि सरकार इस प्रस्ताव पर मुहर लगाती है, तो देश में सभी सेगमेंट के स्मार्टफोन्स की कीमतों में खासी गिरावट देखने को मिल सकती है।

आखिर मोबाइल कंपनियों ने क्यों उठाई GST घटाने की मांग?

कंपनियों का कहना है कि मौजूदा 18 फीसदी जीएसटी की दर उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त और भारी बोझ डाल रही है। स्मार्टफोन निर्माताओं के अनुसार, पिछले एक-दो वर्षों में मोबाइल पार्ट्स और सप्लाई चेन की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिसकी वजह से हैंडसेट के बेस प्राइस पहले ही काफी बढ़ चुके हैं।

जब किसी फोन की टैक्स से पहले की मूल कीमत में 1 रुपये का इजाफा होता है, तो 18 फीसदी जीएसटी के कारण ग्राहक पर 18 पैसे का अतिरिक्त टैक्स भार स्वतः जुड़ जाता है। कंपनियों का तर्क है कि भारत जैसे कीमत-संवेदनशील बाजार में टैक्स की यह ऊंची दर ग्रामीण क्षेत्रों, पहली बार फोन खरीदने वाले ग्राहकों और कम आय वाले परिवारों को डिजिटल क्रांति से दूर कर रही है। लोग अब अपने पुराने फोन को ही ज्यादा समय तक खींच रहे हैं और नया फोन खरीदने या अपग्रेड करने से कतरा रहे हैं।

मेमोरी चिप्स की कीमतों में 4 गुना उछाल से महंगे हुए फोन

स्मार्टफोन की कीमतों में हालिया उछाल के पीछे सबसे बड़ा तकनीकी कारण मेमोरी चिप्स की वैश्विक किल्लत और बढ़ती लागत है।

DRAM और NAND फ्लैश की महंगाई: ICEA के आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर एआई (AI) डेटा सेंटरों की भारी मांग के चलते मोबाइल में इस्तेमाल होने वाली DRAM और NAND फ्लैश मेमोरी की कीमतों में करीब 4 गुना तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सस्ते फोन 45% तक हुए महंगे: इस चिप संकट का सबसे सीधा और घातक प्रहार बजट यानी एंट्री-लेवल स्मार्टफोन्स पर पड़ा है। पिछले एक साल के दौरान 10,000 रुपये के आसपास मिलने वाले स्मार्टफोन्स की कीमतों में 35 से 45 फीसदी तक का उछाल आया है।

10,000 से कम के फोन की सप्लाई घटी: इंडस्ट्री रिपोर्ट के मुताबिक, महंगाई के चलते 10,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स की कुल बाजार हिस्सेदारी और सप्लाई घटकर 5 फीसदी से भी कम रह गई है। ऐसे में कंपनियां अब किफायती रेंज में फोन उतारने में असमर्थ महसूस कर रही हैं।

12% से बढ़ाकर 18% किया गया था टैक्स, अब 5% स्लैब की पैरवी

कंपनियों ने सरकार को जीएसटी लागू होने से पहले और बाद के टैक्स इतिहास की भी याद दिलाई है। जीएसटी लागू होने से पहले मोबाइल फोन पर 1 फीसदी बेसिक एक्साइज ड्यूटी लगती थी और अधिकांश राज्यों में वैट (VAT) की दर 5 फीसदी या उससे कम थी।

जब जुलाई 2017 में जीएसटी व्यवस्था लागू हुई, तब मोबाइल फोन को 12 फीसदी के टैक्स स्लैब में रखा गया था। हालांकि, अप्रैल 2020 में सरकार ने राजस्व और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को दुरुस्त करने के लिए इसे बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिया था। अब मोबाइल एसोसिएशन का कहना है कि फोन आज विलासिता (लक्जरी) की वस्तु नहीं, बल्कि शिक्षा, बैंकिंग और आजीविका की बुनियादी जरूरत बन चुका है, इसलिए इसे 18 फीसदी के बजाय आवश्यक वस्तुओं वाले 5 फीसदी स्लैब में शामिल किया जाना चाहिए। इसके साथ ही मोबाइल कंपोनेंट्स पर भी टैक्स दरों को तर्कसंगत बनाने की मांग की गई है।

अगर 5% हुआ GST तो कितना सस्ता होगा आपका नया फोन?

यदि जीएसटी काउंसिल मोबाइल कंपनियों की मांग पर सहमति जताती है और टैक्स में 13 फीसदी (18% से घटकर 5%) की कटौती होती है, तो रिटेल मार्केट में स्मार्टफोन की कीमतों में सीधा असर देखने को मिलेगा:

₹10,000 का फोन: बेस प्राइस पर टैक्स घटने से इस सेगमेंट के फोन लगभग ₹1,000 से ₹1,200 तक सस्ते हो सकते हैं।

₹20,000 का मिड-रेंज फोन: 18 फीसदी टैक्स के साथ ₹20,000 के बेस प्राइस वाला फोन आज लगभग ₹23,600 का पड़ता है। टैक्स 5 फीसदी होने पर यह कीमत घटकर लगभग ₹21,000 के आसपास आ सकती है, यानी करीब ₹2,500 से ₹2,600 तक की सीधी बचत।

प्रीमियम और फ्लैगशिप फोन: ₹50,000 से ₹1,00,000 की श्रेणी वाले प्रीमियम फोन्स पर ग्राहकों को ₹6,000 से लेकर ₹12,000 तक की भारी राहत मिल सकती है।

कंपनियों का यह भी तर्क है कि टैक्स घटने से भले ही प्रति फोन टैक्स कम मिले, लेकिन बिक्री में उछाल आने से सरकार का कुल राजस्व घटेगा नहीं, बल्कि मांग बढ़ने और डिजिटल सेवाओं के प्रसार से अर्थव्यवस्था को मजबूती ही मिलेगी। अब सभी की निगाहें आगामी जीएसटी काउंसिल की बैठक पर टिकी हैं कि सरकार इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाती है।