इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय क्यों ज़रूरी हैं फॉर्म 16 और 16A? जानिए आसान भाषा में पूरी जानकारी
India News Live,Digital Desk : वित्त वर्ष 2024-25 (असेसमेंट ईयर 2025-26) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। अगर आप सैलरीड व्यक्ति हैं या फिर आपने बैंक से ब्याज या कमीशन की आमदनी पाई है, तो आपके लिए फॉर्म 16 और फॉर्म 16A की जानकारी होना बहुत जरूरी है।
फॉर्म 16 और 16A आखिर क्या हैं?
ये दोनों दस्तावेज TDS यानी टैक्स डिडक्शन एट सोर्स से जुड़े अहम प्रमाणपत्र होते हैं। जब कोई संस्था या एंप्लॉयर आपकी आमदनी पर टैक्स काटकर सरकार को जमा करता है, तो इसका सबूत यही फॉर्म होते हैं।
फॉर्म 16: नौकरीपेशा लोगों के लिए
अगर आप किसी कंपनी में नौकरी करते हैं तो वो कंपनी आपकी सैलरी से टैक्स काटती है और आपको हर साल फॉर्म 16 देती है। इस फॉर्म में ये सारी जानकारियां होती हैं:
कितना टैक्स कटा,
कब-कब और कितनी रकम सरकार को जमा की गई,
आपका PAN नंबर और कंपनी का TAN नंबर,
पूरी साल की सैलरी का ब्रेकअप,
आपने 80C, 80D जैसे सेक्शनों में कौन-कौन सी टैक्स छूट ली है।
फॉर्म 16 के दो हिस्से होते हैं:
Part A: इसमें TDS की समरी होती है।
Part B: इसमें आपकी सैलरी और डिडक्शन की पूरी डिटेल होती है।
ध्यान रखें कि ये दोनों पार्ट सिर्फ TRACES वेबसाइट से डाउनलोड किया गया हो तभी वैध माना जाता है।
फॉर्म 16A: अन्य आमदनी के लिए
अगर आपने बैंक में एफडी किया है, किसी से प्रोफेशनल फीस ली है या कोई कमीशन पाया है, तो टैक्स कटने पर आपको फॉर्म 16A मिलता है। यह भी एक तरह का TDS प्रमाणपत्र है जिसमें ये जानकारियां होती हैं:
कितना ब्याज या फीस मिली,
कितना टैक्स कटा और जमा हुआ,
सर्टिफिकेट नंबर, PAN और TAN डिटेल,
पेमेंट का प्रकार और रकम।
यह फॉर्म भी TRACES वेबसाइट से डाउनलोड किया गया होना जरूरी है।
क्यों जरूरी हैं ये फॉर्म?
जब आप इनकम टैक्स रिटर्न भरते हैं, तो इन फॉर्म्स की मदद से आप यह साबित कर सकते हैं कि आपकी आमदनी पर पहले ही टैक्स कट चुका है। इससे आपको टैक्स से जुड़ी गलतफहमियों से बचने में मदद मिलती है और रिफंड क्लेम करना भी आसान हो जाता है।