जब गोविंदा की देरी से तिलमिलाए संजय दत्त, ‘जोड़ी नंबर 1’ के सेट पर हुआ था ड्रामा

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India News Live,Digital Desk : 90 और 2000 के दशक में अगर किसी एक्टर ने अपने डांस, कॉमेडी और स्टाइल से दर्शकों का दिल जीता था, तो वो थे गोविंदा। उस दौर में उनका नाम ही फिल्म की सफलता की गारंटी माना जाता था। लेकिन पर्दे के पीछे एक बात थी जो लगभग हर को-स्टार और डायरेक्टर को परेशान कर देती थी — उनकी लेट-लतीफी।

गोविंदा की इस आदत से सिर्फ टीम ही नहीं, कभी-कभी उनके साथ काम करने वाले बड़े स्टार्स भी नाराज हो जाते थे। ऐसा ही एक किस्सा है संजय दत्त के साथ, जो फिल्म जोड़ी नंबर 1 (2001) के दौरान हुआ था।

रजत बेदी ने खोला सेट का पुराना राज

फिल्म में रजत बेदी ने भी अहम किरदार निभाया था। हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि शूटिंग के दौरान गोविंदा की लेट-लतीफी ने सबको परेशान कर दिया था।

रजत ने कहा –

“डेविड धवन सुबह 7 बजे शूट शुरू करना चाहते थे, लेकिन मैं और संजय दत्त सुबह 6 बजे ही सेट पर पहुंच गए थे। सब इंतजार कर रहे थे कि गोविंदा कब आएंगे। बाद में पता चला कि वो अभी तक घर पर ही हैं।”

दोपहर होते-होते संजय दत्त का पारा चढ़ गया

रजत के मुताबिक, टीम ने किसी को गोविंदा के घर भेजा ताकि वो उन्हें सेट पर लेकर आए। लेकिन वक्त बीतता गया, और दोपहर के करीब 2 बजते-बजते संजय दत्त का सब्र टूट गया।

उन्होंने बताया,

“किसी को पता ही नहीं था कि गोविंदा हैदराबाद से फ्लाइट से आ रहे हैं। वो सीधे दोपहर 3 बजे पहुंचे और तभी असली ड्रामा शुरू हुआ।”

गुस्से में बदल गया पूरा सीन

रजत बेदी ने आगे कहा कि उस सीन में संजय दत्त के डायलॉग्स गोविंदा से कम थे, जिससे उनका गुस्सा और बढ़ गया।

“संजू ने असिस्टेंट को डांटते हुए कहा – ‘तुम ये डायलॉग्स गोविंदा को दे दो, मैं नहीं करूंगा।’ फिर वहीं पूरा सीन बदल गया।”

गोविंदा की लेट-लतीफी: स्टारडम की कीमत?

हालांकि गोविंदा का टैलेंट और करिश्मा अपनी जगह बेमिसाल था, लेकिन उनकी देरी से पहुंचने की आदत इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बन गई थी। कई बार डायरेक्टर और एक्टर्स उनके टाइम मैनेजमेंट को लेकर परेशान होते थे, पर उनकी लोकप्रियता ऐसी थी कि कोई खुलकर कुछ कह भी नहीं पाता था।

नतीजा – एक यादगार फिल्म, पर पीछे कई अनकही कहानियाँ

जोड़ी नंबर 1 बॉक्स ऑफिस पर हिट रही, लेकिन इसके पीछे की ये कहानी बताती है कि बॉलीवुड की चमक के पीछे भी कई बार टेंशन और मतभेद छिपे होते हैं।