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May 02 2026 07:08 pm

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: ममता बनाम शुभेंदु की महाजंग का आगाज, 'SIR' पर मचा घमासान बदलेगा बंगाल की सियासी तकदीर..

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल की सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने के लिए साल 2026 के विधानसभा चुनावों का बिगुल आधिकारिक तौर पर बज चुका है। चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान कर दिया है, जिसके साथ ही बंगाल में सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस बार का चुनाव महज सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि बंगाल की अस्मिता और वजूद का संग्राम बनता जा रहा है। जहां एक ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके सिपहसालार अभिषेक बनर्जी 'खेला होबे' के नए अध्याय की तैयारी में हैं, वहीं नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने सीधे 'दीदी' के गढ़ में सेंध लगाने के लिए मोर्चा खोल दिया है।

मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) बना सियासी 'हथियार'

बंगाल चुनाव की रणभेरी बजने के साथ ही सबसे बड़ा विवाद 'मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण' (Special Intensive Revision - SIR) को लेकर छिड़ा हुआ है। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। भाजपा जहां इसे 'फर्जी वोटरों' को बाहर निकालने का जरूरी कदम बता रही है, वहीं सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे अल्पसंख्यकों और वैध नागरिकों को परेशान करने वाली साजिश करार दिया है। करीब 60 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम जांच के दायरे में आने से दोनों खेमों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है, जिसका सीधा असर आने वाले दिनों में मतदान के समीकरणों पर पड़ना तय माना जा रहा है।

ममता का 'स्ट्रीट फाइटर' अंदाज और अभिषेक की रणनीति

एक बार फिर ममता बनर्जी अपनी पुरानी छवि यानी 'स्ट्रीट फाइटर' के रूप में मैदान में उतर चुकी हैं। वह कोलकाता की सड़कों पर धरने पर बैठकर केंद्र और चुनाव आयोग के खिलाफ हुंकार भर रही हैं। दूसरी तरफ, पार्टी के 'सेनापति' अभिषेक बनर्जी संगठन को डेटा और तकनीक के दम पर मजबूती दे रहे हैं। टीएमसी इस बार 'बाहरी बनाम बंगाली' के साथ-साथ 'जनकल्याण बनाम उत्पीड़न' के नैरेटिव पर चुनाव लड़ने जा रही है। ममता सरकार द्वारा हाल ही में पुरोहितों और मुअज्जिनों के मानदेय में वृद्धि और डीए (DA) बकाया चुकाने की घोषणा को भी चुनावी मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है।

सुवेंदु अधिकारी की ललकार और भाजपा का मिशन-200

नंदीग्राम में ममता बनर्जी को मात देने वाले सुवेंदु अधिकारी इस बार भाजपा के सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे हैं। शुभेंदु ने स्पष्ट कर दिया है कि वह भ्रष्टाचार और तुष्टीकरण के मुद्दों पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। भाजपा का लक्ष्य इस बार 200 से ज्यादा सीटें जीतकर बंगाल में ऐतिहासिक बदलाव लाने का है। पार्टी खासतौर पर उत्तर बंगाल और जंगलमहल जैसे क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। शुभेंदु के नेतृत्व में भाजपा ने चुनाव आयोग से निष्पक्ष और हिंसा मुक्त चुनाव कराने की पुरजोर मांग की है, जिसके चलते इस बार मतदान के चरणों और सुरक्षा व्यवस्था पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।