West Asia Crisis : अमेरिका-ईरान जंग की आग में झुलसेगी आपकी जेब! होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से भारत में तेल संकट का खतरा

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम एशिया (Middle East) के रणक्षेत्र में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य संघर्ष अब दुनिया भर की अर्थव्यवस्था के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है। रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। इस संकट का सबसे सीधा और कड़ा प्रहार भारत पर पड़ने की आशंका है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है, ऐसे में आपूर्ति बाधित होने का मतलब है कि आने वाले दिनों में आम आदमी की जेब पर महंगाई का बड़ा बोझ पड़ने वाला है।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना जंग का अखाड़ा, वैश्विक बाजार में हाहाकार

ईरान और इजरायल के बीच जारी तनातनी ने होर्मुज जलडमरूमध्य को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। यह वही समुद्री रास्ता है जहाँ से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बाधित करने की धमकियों के बीच कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मार्ग पूरी तरह से बंद होता है या यहाँ जहाजों को निशाना बनाया जाता है, तो तेल आपूर्ति की चैन पूरी तरह टूट जाएगी, जिसका असर सीधे तौर पर पेट्रोल और डीजल की अनुपलब्धता के रूप में दिख सकता है।

भारत के लिए बड़ी चुनौती: पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर होंगे महंगे?

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। मिडिल ईस्ट में मचे इस घमासान से भारतीय तेल कंपनियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। यदि होर्मुज के रास्ते कच्चे तेल की खेप समय पर नहीं पहुँचती है, तो घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लगनी तय है। इतना ही नहीं, रसोई गैस (LPG) की कीमतों पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा। तेल मार्केटिंग कंपनियों का कहना है कि वे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दाम और शिपिंग रिस्क के चलते कीमतों को स्थिर रखना मुश्किल होता जा रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा पर संकट और सरकार की वैकल्पिक तैयारी

भारत सरकार इस संवेदनशील स्थिति में अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर लगातार सक्रिय है। एक तरफ जहाँ ईरान और अन्य देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत जारी है, वहीं दूसरी तरफ वैकल्पिक मार्गों और अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो देश में महंगाई दर (Inflation) में बड़ी वृद्धि हो सकती है, जो सीधे तौर पर परिवहन, खाद्य वस्तुओं और बुनियादी सेवाओं को महंगा कर देगी। फिलहाल, दुनिया भर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच का यह संघर्ष शांत होता है या पूरी दुनिया को एक बड़े आर्थिक संकट की ओर धकेलता है।