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November 06 2026 04:37 am

'आर्टिफिशियल' शब्द से ट्रंप को थी चिढ़: अमेरिकी सरकार ने बदला AI का नाम, अब कहलाएगी 'सुपर इंटेलिजेंस'

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में उस समय एक अनोखा मोड़ आ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक तौर पर 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) शब्द को बदलकर 'सुपर इंटेलिजेंस' (Super Intelligence - SI) करने का बड़ा फैसला सुना दिया। व्हाइट हाउस में टेक दिग्गजों की मौजूदगी के बीच ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें सभी अमेरिकी संघीय एजेंसियों और आधिकारिक दस्तावेजों में 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' या 'AI' शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाते हुए इसकी जगह 'सुपर इंटेलिजेंस' या 'SI' का उपयोग अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया है। ट्रंप ने इसे इंटरनेट से भी बड़ी क्रांति करार देते हुए कहा कि अमेरिका को इस तकनीक की परिभाषा और नामकरण दोनों में दुनिया का नेतृत्व करना होगा।

'आर्टिफिशियल का मतलब फेक': ट्रंप को पुराने नाम से क्या थी आपत्ति?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' शब्द की सटीकता और प्रभाव पर सार्वजनिक मंचों पर सवाल उठाते रहे हैं। ट्रंप का सीधा तर्क है कि 'आर्टिफिशियल' (Artificial) शब्द का हिंदी और अंग्रेजी दोनों में सामान्य अर्थ 'नकली', 'बनावटी' या 'झूठा' निकलता है। ट्रंप ने अपने बयानों में इसकी तुलना 'फेक न्यूज' से करते हुए कहा कि जब कोई चीज इतनी असाधारण, शक्तिशाली और दुनिया को बदलने की क्षमता रखती है, तो उसके नाम में 'आर्टिफिशियल' जैसे कमजोर और नकारात्मक शब्द का इस्तेमाल करना बिल्कुल गलत और अनुपयुक्त है।

ट्रंप का मानना है कि यह तकनीक इंसानी बुद्धिमत्ता से कहीं अधिक तेजी से गणना करने, डेटा प्रोसेस करने और समस्याओं को हल करने की क्षमता रखती है। इसलिए इसे 'आर्टिफिशियल' कहना इसके वास्तविक सामर्थ्य को कम आंकने जैसा है। कुछ दिनों पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर जनता से राय भी मांगी थी और 'सुपीरियर इंटेलिजेंस' (Superior Intelligence), 'एक्सट्रीम इंटेलिजेंस' (Extreme Intelligence) और 'सुपर इंटेलिजेंस' जैसे विकल्पों पर चर्चा की थी, जिसके बाद अंततः उन्होंने 'सुपर इंटेलिजेंस' (SI) को आधिकारिक तौर पर चुना। उनका कहना है कि नया नाम इस तकनीक की असीम ताकत, गरिमा और भविष्य के प्रभाव को सही ढंग से दर्शाता है।

टेक लीडर्स की मौजूदगी में हुआ फैसला: 60 दिनों में कानून में संशोधन की तैयारी

व्हाइट हाउस में आयोजित विशेष बैठक के दौरान एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग और सुंदर पिचाई समेत सिलिकॉन वैली के कई शीर्ष टेक सीईओ मौजूद थे। इस दौरान ट्रंप ने कहा कि जिस तरह अमेरिका ने इंटरनेट युग का नेतृत्व किया, उसी तरह सुपर इंटेलिजेंस के दौर में भी अमेरिका को चीन और अन्य वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से बहुत आगे रहना होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए उन्होंने इसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी तकनीकी छलांग बताया।

प्रशासनिक आदेश के तहत अमेरिकी सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग को 60 दिनों की समयसीमा दी गई है। इस अवधि के भीतर विभाग को अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में एक प्रस्ताव पेश करना होगा, ताकि अमेरिकी कानूनों और वैज्ञानिक संहिताओं में 'सुपर इंटेलिजेंस' को कानूनी परिभाषा दी जा सके। हालांकि, यह बदलाव केवल भविष्य के आधिकारिक दस्तावेजों, रणनीतियों और सरकारी समझौतों पर लागू होगा; पुराने ऐतिहासिक अभिलेखों और पहले से मौजूद संघीय अनुबंधों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। ट्रंप प्रशासन के इस रीब्रांडिंग कदम ने वैश्विक स्तर पर तकनीकविदों, भाषाविदों और नीति निर्माताओं के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।