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October 21 2026 06:18 pm

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जल्द मुहर संभव, पाकिस्तान को लेकर ट्रंप का सख्त रुख

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India News Live,Digital Desk : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को बड़ा बयान देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे अमलीजामा पहनाया जा सकता है। ट्रंप ने यह भी जानकारी दी कि पाकिस्तान के प्रतिनिधि अगले हफ्ते वॉशिंगटन आ रहे हैं, जिससे दोनों देशों के बीच बातचीत संभव हो सके।

ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "पाकिस्तान के अधिकारी अगले हफ्ते अमेरिका आ रहे हैं। हम भारत के साथ एक मजबूत व्यापार समझौते के बेहद करीब हैं।" हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अगर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव और बढ़ता है या युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तो अमेरिका इन समझौतों से खुद को दूर रखेगा।

उन्होंने कहा, "हम किसी ऐसे देश से व्यापार नहीं कर सकते जो आपस में युद्ध की स्थिति में हों या परमाणु हथियारों की धमकी दे रहे हों। मैंने यही बात भारत और पाकिस्तान दोनों को समझाई, और लगता है उन्होंने इसे गंभीरता से लिया है, तभी हालात अब थोड़े शांत हुए हैं।"

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की थी। यह कदम 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में उठाया गया था, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी।

इस बीच अमेरिका की व्यापार नीति में भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान पर 29% तक टैरिफ लगाने की योजना बना रहा है, क्योंकि पाकिस्तान को अमेरिका के साथ 3 अरब डॉलर का व्यापार लाभ मिल रहा है। अगर भारत जुलाई तक अमेरिका के साथ समझौते पर नहीं पहुंचता है, तो उसे भी 26% टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है।

भारत सरकार भी इस दिशा में सक्रिय नजर आ रही है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में अमेरिका का दौरा किया है ताकि व्यापार वार्ता में तेजी लाई जा सके। साथ ही विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 27 से 29 मई के बीच अमेरिका यात्रा कर वहां के डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट क्रिस्टोफर लैंडाउ से मुलाकात की। इस मुलाकात को भारतीय दूतावास ने "एक सकारात्मक शुरुआत" बताया है।

रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार भारत 50 अरब डॉलर से अधिक के सरकारी खरीद बाजार को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलने पर विचार कर सकता है। यह कदम भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।