होर्मुज पर ट्रंप की 'लॉन्ग-टर्म सीज' रणनीति: ईरान की तेल लाइफलाइन काटने का मास्टरप्लान

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India News Live,Digital Desk : सामरिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर चल रहा संकट अब एक नए और अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश कर गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को घुटनों पर लाने के लिए 'लॉन्ग-टर्म सीज' (लंबी घेराबंदी) का मन बना लिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन अब सीधे सैन्य हमले के बजाय आर्थिक नाकेबंदी को हथियार बनाकर ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त करने की योजना पर काम कर रहा है।

ट्रंप का 'प्लान सी': न सीधा युद्ध, न पूर्ण शांति

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप के सामने तीन विकल्प थे। पहला—ईरान पर भीषण हवाई हमले शुरू करना, और दूसरा—युद्ध को तुरंत खत्म कर समझौता करना। ट्रंप ने इन दोनों के बीच का रास्ता यानी 'प्लान सी' चुना है। इसके तहत अमेरिका होर्मुज में अपनी नौसैनिक घेराबंदी तब तक जारी रखेगा, जब तक ईरान उनकी शर्तों पर झुक नहीं जाता। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इससे अमेरिकी सैनिकों की जान को जोखिम में डाले बिना ईरान पर अधिकतम दबाव बनाया जा सकता है।

ईरान के सामने 'स्टोरेज' का महासंकट

अमेरिका की इस नाकेबंदी का असर अब ईरान के जमीनी हालात पर दिखने लगा है। निर्यात ठप होने के कारण ईरान में कच्चे तेल का भंडार अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया है:

जगह की कमी: रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के पास अब केवल 12 से 22 दिन का तेल स्टोर करने की जगह बची है।

डेड टैंकरों का सहारा: मजबूरी में ईरान ने अपने उन पुराने और बेकार हो चुके (Dead) टैंकरों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है, जो सालों से बंद पड़े थे। इन टैंकरों को समुद्र में तैरते हुए 'स्टोरेज डिपो' के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

उत्पादन ठप होने का डर: यदि स्टोरेज पूरी तरह भर जाता है, तो ईरान को अपने तेल के कुएं बंद करने पड़ेंगे। तेल उत्पादन बंद करना तकनीकी रूप से जटिल और आर्थिक रूप से आत्मघाती कदम होगा।

होर्मुज को 'आर्थिक हथियार' बना रहा अमेरिका

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है। अमेरिका ने इस रास्ते पर ऐसी नाकेबंदी की है कि ईरान के तेल टैंकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। ट्रंप का लक्ष्य ईरान के तेल निर्यात को 'जीरो' पर लाना है। इस रणनीति से ईरान के राजस्व (Revenue) में भारी गिरावट आई है, जिससे वहां महंगाई और बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है।

विशेषज्ञों की राय: अमेरिका सीधे युद्ध से बचते हुए ईरान पर दबाव बनाए रखने का संतुलित तरीका अपना रहा है।

ईरान का 'बदले में बदला' प्रस्ताव

मुश्किलों में घिरे ईरान ने अमेरिका को एक नया कूटनीतिक प्रस्ताव भेजा है। ईरान की शर्तें इस प्रकार हैं:

नाकेबंदी हटे: अमेरिका तुरंत होर्मुज से अपनी नौसेना हटाए और व्यापारिक जहाजों को जाने दे।

प्रतिबंधों में ढील: बदले में ईरान भी अमेरिका पर लगाए गए अपने जवाबी प्रतिबंधों को हटा लेगा।

अस्थाई युद्ध विराम: मार्ग खुलने के बाद ही ईरान परमाणु कार्यक्रम और स्थाई शांति पर चर्चा करने को तैयार होगा।

हालांकि, व्हाइट हाउस ने अब तक इस प्रस्ताव पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी है। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ईरान यह प्रस्ताव केवल समय काटने और अपनी स्टोरेज समस्या सुलझाने के लिए दे रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

होर्मुज के बंद होने से केवल ईरान ही नहीं, बल्कि भारत, चीन और जापान जैसे तेल आयातक देशों की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं। आपूर्ति बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिर बनी हुई हैं। यदि ट्रंप की यह 'लंबी घेराबंदी' जारी रहती है, तो दुनिया को एक बड़े ऊर्जा संकट (Energy Crisis) का सामना करना पड़ सकता है।