ट्रंप बनाम पुतिन, अमेरिकी चुनाव से पहले गरमाया यूक्रेन का 'सवाल', क्या होगा नया 'अफगानिस्तान' जैसा फेलियर

Post

India News Live,Digital Desk : विश्व मंच पर इस वक्त सबकी निगाहें अमेरिका की राजनीति पर टिकी हैं, क्योंकि वहां का राष्ट्रपति चुनाव न सिर्फ अमेरिकी बल्कि पूरे विश्व की दशा-दिशा तय करने वाला है। खासकर यूक्रेन युद्ध के भविष्य को लेकर बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका, जो अभी तक खुलकर यूक्रेन के साथ खड़ा रहा है, अगर भविष्य में सत्ता बदली तो उसकी नीतियां भी बदल जाएंगी? इसी बीच, एक बड़ी बहस छिड़ी है: क्या रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अमेरिकी चुनाव का इंतजार कर रहे हैं, ताकि यूक्रेन में डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में कोई "बड़ा गेम चेंजर" हो सके?

पुतिन की उम्मीदें: 2024 और ट्रंप की वापसी
कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को अचानक तेज क्यों कर दिया है, उनकी रणनीति के पीछे एक बड़ी वजह 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव हैं। उनका मानना है कि पुतिन को यह उम्मीद है कि अगर डोनाल्ड ट्रंप दोबारा अमेरिका के राष्ट्रपति बनते हैं, तो शायद उन्हें यूक्रेन के मुद्दे पर कोई बड़ी "रियायत" मिल जाए। ट्रंप अक्सर अपनी 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति और NATO जैसे सैन्य गठबंधनों पर अपने विचार साफ रखते रहे हैं, जिससे ऐसी संभावनाएं बनती हैं।

'अफगानिस्तान' की तुलना, पर संदर्भ अलग
जो बिडेन प्रशासन ने अफगानिस्तान से जैसे अराजक तरीके से पीछे हटकर जो नीतिगत 'नाकामी' का अनुभव किया था, उसी तरह अब कुछ विशेषज्ञ कयास लगा रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप अगर फिर राष्ट्रपति बनते हैं, तो यूक्रेन में भी वैसी ही कुछ 'गलती' दोहरा सकते हैं। हालांकि, यूक्रेन और अफगानिस्तान के हालात बिल्कुल अलग हैं, लेकिन यहां बात उस 'नीतिगत फेलियर' की हो रही है, जिससे अमेरिका को विश्व मंच पर अपनी प्रतिष्ठा पर चोट लग सकती है।

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम, जो गृह मंत्री अमित शाह के भी करीबी माने जाते हैं, उन्होंने भारत और चीन को रूस से तेल न खरीदने की चेतावनी दी थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि अगर कोई भी देश रूस को मजबूत करता है तो ट्रंप जैसा 30 फीसदी टैरिफ लग सकता है। उनके बयान से साफ है कि ट्रंप के वापस आने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में बड़े बदलाव आ सकते हैं।

क्या थम जाएगी यूक्रेन को मदद?
सवाल ये भी उठता है कि अगर ट्रंप दोबारा सत्ता में आते हैं, तो क्या यूक्रेन को मिलने वाली अमेरिकी सहायता भी प्रभावित होगी? अगर अमेरिका का समर्थन कम या खत्म होता है, तो यूक्रेन को नाटो और यूरोपीय देशों पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ सकता है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता और प्रतिरोध पर गहरा असर पड़ सकता है।

फिलहाल यह सिर्फ कयास हैं, लेकिन 2024 का अमेरिकी चुनाव निश्चित तौर पर यूक्रेन युद्ध की दिशा तय करने वाला एक अहम पड़ाव होगा। दुनिया भर की नजरें इस पर टिकी हैं कि अमेरिका में कौन राष्ट्रपति बनता है और उसका क्या प्रभाव इस वैश्विक संघर्ष पर पड़ता है।