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July 31 2026 03:11 am

ट्रंप ने दिया व्यापारिक चेतावनी का अल्टीमेटम, 14 देशों को टैरिफ बढ़ाने की धमकी

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India News Live,Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 देशों को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि अगर उन्होंने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता नहीं किया, तो 1 अगस्त से उन पर भारी आयात शुल्क (इम्पोर्ट टैरिफ) लगाया जाएगा। ये चेतावनी ऐसे समय पर आई है जब ट्रंप पहले ही अप्रैल में अधिकतर देशों को 90 दिन की छूट दे चुके थे।

किस पर है ट्रंप की नजर?
ट्रंप उन देशों से नाराज हैं जिनके साथ अमेरिका का व्यापार घाटा बहुत ज्यादा है। इनमें जापान (68.5 अरब डॉलर का सरप्लस), दक्षिण कोरिया (66 अरब डॉलर), थाईलैंड (45.6 अरब डॉलर) और इंडोनेशिया (17.9 अरब डॉलर) प्रमुख हैं।

दक्षिण कोरिया पर दबाव
दक्षिण कोरिया पहले ही अमेरिकी स्टील और कार उद्योग पर भारी टैक्स झेल रहा है। वहां 25% तक का टैरिफ लग चुका है। अब उम्मीद है कि दोनों देश 1 अगस्त से पहले किसी समझौते तक पहुंच जाएंगे।

जापान को भी झटका
जापान, जो अमेरिका में सबसे ज्यादा निवेश करता है, अब अपने ऑटो उद्योग पर 25% टैरिफ झेल रहा है। ट्रंप ने आरोप लगाया है कि जापान अमेरिकी चावल और गाड़ियों के लिए अपना बाजार ठीक से नहीं खोल रहा।

इंडोनेशिया की रणनीति
इंडोनेशिया ने अमेरिका से कृषि और ऊर्जा उत्पाद ज्यादा खरीदने की योजना बनाई है ताकि 32% टैरिफ से राहत मिल सके। उसने अगले 5 सालों तक हर साल 10 लाख टन अमेरिकी गेहूं खरीदने का समझौता किया है, जिसकी कीमत करीब 1.25 अरब डॉलर होगी।

कंबोडिया को राहत, लेकिन शर्तों के साथ
अप्रैल में ट्रंप ने कंबोडिया पर 49% टैरिफ लगाने की बात कही थी, लेकिन अब इसे घटाकर 36% कर दिया गया है। कंबोडिया ने 19 अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने का वादा किया है।

थाईलैंड और बांग्लादेश पर भी नजर
थाईलैंड को भी 36% शुल्क का सामना करना पड़ सकता है। उसने अमेरिकी कृषि उत्पाद, ऊर्जा और बोइंग विमानों के ऑर्डर के जरिए समझौते की कोशिश की है।

बांग्लादेश, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक है, को 35% टैरिफ की चेतावनी दी गई है। हालांकि उसे उम्मीद है कि जुलाई के पहले हफ्ते तक समझौता हो जाएगा। बांग्लादेश ने अमेरिकी गेहूं, कपास और तेल खरीदने और बोइंग विमान ऑर्डर देने का प्रस्ताव दिया है।

म्यांमार और लाओस की स्थिति
म्यांमार और लाओस को 40% तक के टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है। ये देश चीन पर निवेश के लिए बहुत हद तक निर्भर हैं और इनकी आपूर्ति श्रृंखला चीन से गहराई से जुड़ी है।