This year's festival of lights : 6 दिन की खुशियों और परंपराओं का सफर
- by Priyanka Tiwari
- 2025-10-11 18:16:00
India News Live,Digital Desk : इस साल दीपोत्सव कुछ अलग और खास होने वाला है। आमतौर पर पांच दिन मनाया जाने वाला यह त्योहार इस बार छह दिन तक चलेगा। पंचांग में बदलाव के कारण हर दिन की अपनी अलग महत्ता है। 18 अक्टूबर से 23 अक्टूबर तक का यह पर्व हर दिन अपने आप में विशेष और खुशियों से भरा रहेगा।
धनतेरस से लेकर दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज तक, हर दिन पूजा-पाठ, परंपरा और उत्सव का हिस्सा है। आइए जानते हैं कि इस दीपोत्सव के हर दिन का क्या महत्व है।
18-19 अक्टूबर: धनतेरस
दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इस दिन सोना, चांदी, बर्तन और वाहन खरीदना शुभ माना जाता है। भगवान धन्वंतरि की पूजा कर स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है। शाम को दीपदान कर उत्सव का आरंभ किया जाता है।
20 अक्टूबर: दीपावली
दीपावली दीपोत्सव का सबसे पवित्र और प्रतीक्षित दिन है। इस दिन घरों में लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा होती है। दीपक जलाकर अंधकार पर प्रकाश की विजय का संदेश दिया जाता है। घर-मंदिर मिठाइयों और पकवानों से सजते हैं और खुशियों से महक उठते हैं।
21 अक्टूबर: अमावस्या
इस दिन पूरे दिन अमावस्या तिथि रहती है। परंपरा के अनुसार, अमावस्या पर कोई विशेष पूजा नहीं की जाती। इसलिए गोवर्धन पूजा अगले दिन की जाती है।
22 अक्टूबर: गोवर्धन पूजा
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विशेष महत्व है। घरों और मंदिरों में अन्नकूट महोत्सव मनाया जाता है। यह पर्व प्रकृति, अन्न और भगवान के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है।
23 अक्टूबर: भाई दूज
दीपोत्सव का आखिरी दिन भाई दूज होता है, जो भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है। बहनें भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख की कामना करती हैं। भाई भी बहन को प्रेम और आशीर्वाद देते हैं।
दीपावली: अंधकार पर प्रकाश की विजय
दीपावली सिर्फ दीपक जलाने का त्योहार नहीं है। यह अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है। जैसे अंधेरे में एक छोटा दीपक रास्ता दिखाता है, वैसे ही दीपावली हमें जीवन में नकारात्मकता और दुख पर विजय पाने की प्रेरणा देती है।
घर, आंगन और मंदिरों में दीपक सजाकर हर कोने में रौशनी फैलती है। यह रौशनी न केवल घर को, बल्कि हमारे रिश्तों और दिलों को भी उज्जवल करती है।