The cryptocurrency market in 2025 : बिटकॉइन ने छुए नए शिखर, लेकिन आई भारी गिरावट

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India News Live,Digital Desk : क्रिप्टोकरेंसी बाजार अपनी अनिश्चितताओं के लिए जाना जाता है। नियामक दबावों के कारण वर्ष 2025 में क्रिप्टोकरेंसी बाजार में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले। 2025 में क्रिप्टोकरेंसी का बाजार पूंजीकरण पहली बार 4 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया। आइए जानते हैं कि 2025 में क्रिप्टोकरेंसी बाजार का प्रदर्शन कैसा रहा और बिटकॉइन की कीमत में क्या बदलाव आए।

साल की शुरुआत शानदार रही।

क्रिप्टोकरेंसी के लिए साल की शुरुआत दमदार रही। कई नए निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में क्रिप्टोकरेंसी को शामिल किया। बिटकॉइन की कीमत 2025 के पहले महीने में ही 100,000 डॉलर के पार पहुंच गई। अमेरिकी सरकार द्वारा क्रिप्टोकरेंसी को अपनाना और नीतिगत बदलाव इसके मुख्य कारण थे। इस साल भारत में भी क्रिप्टोकरेंसी निवेशकों की संख्या में तेजी से वृद्धि देखी गई। बड़े शहरों और छोटे कस्बों, दोनों के निवेशकों ने इस साल क्रिप्टोकरेंसी में अपना भरोसा दिखाया है।

अनिश्चितता ने क्रिप्टोकरेंसी के प्रदर्शन को बर्बाद कर दिया है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों ने वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता का माहौल बना दिया है। टैरिफ और अन्य नीतियों का असर कई देशों में देखने को मिला है। जब भी वैश्विक अनिश्चितता का माहौल होता है, निवेशक क्रिप्टो जैसी जोखिम भरी संपत्तियों से दूर रहते हैं। इसका असर बाजार पर पड़ा है। इसके चलते क्रिप्टोकरेंसी बाजार में गिरावट आई है। दिसंबर में बिटकॉइन की कीमत लगभग 90,000 डॉलर थी।

2025 में बिटकॉइन का रुझान

बिटकॉइन के लिए साल की शुरुआत काफी दमदार रही। जनवरी में इसकी कीमत 100,000 डॉलर से ऊपर पहुंच गई थी, लेकिन अब यह गिरकर लगभग 90,000 डॉलर पर आ गई है। इससे पहले, अक्टूबर में बिटकॉइन की कीमत 126,000 डॉलर तक पहुंच गई थी, जो इसका अब तक का उच्चतम स्तर था।

हालांकि, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बाद में आई तीव्र गिरावट ने निवेशकों को भारी झटका दिया। नवंबर में बिटकॉइन की कीमत 80,000 डॉलर से नीचे गिर गई। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी पिछले साल 12 प्रतिशत से अधिक गिर गई है। क्रिप्टोकरेंसी बाजार में पूरे साल महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं। बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी ने सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ, लेकिन उनमें भारी गिरावट भी आई, जिसके परिणामस्वरूप निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।