नेपाल में सुशीला कार्की अंतरिम प्रधानमंत्री बनें, जानिए क्यों बनी आम सहमति

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India News Live,Digital Desk : नेपाल में केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद देश में नया राजनीतिक अध्याय शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री पद के लिए कई नामों पर चर्चा थी — कुलमन घीसिंग, बलेन शाह और दुर्गा प्रसाई जैसे नाम सामने आए। लेकिन आखिरकार, सुशीला कार्की के नाम पर सभी दलों और नेताओं में आम सहमति बन गई।

आइए जानते हैं, आखिर क्यों चुना गया सुशीला कार्की का नाम और कौन-कौन से कारण हैं जिन्होंने उनके पक्ष में माहौल बनाया।

1. न्यायपालिका का अनुभव

सुशीला कार्की ने नेपाल की सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश के रूप में काम किया है। यह अनुभव उन्हें व्यवस्था और सत्ता की गहरी समझ देता है। उनके कार्यकाल में भ्रष्टाचार और कानूनी मामलों पर कई स्पष्ट टिप्पणियाँ हुईं, जिससे उन्हें देश के संवैधानिक और कानूनी मसलों की अच्छी जानकारी है।

2. भारत के साथ मजबूत संबंध

कार्की का भारत से जुड़ाव भी एक बड़ा कारण रहा। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और उनके अच्छे संबंध भारत के नेताओं के साथ हैं। जब उनका नाम प्रधानमंत्री पद के लिए सामने आया, तो उन्होंने तुरंत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। नेपाल और भारत के करीबी संबंधों को देखते हुए यह कदम राजनीतिक रूप से संतुलन बनाने में मददगार साबित हुआ।

3. राजनीतिक विवाद से दूर

कार्की किसी राजनीतिक दल या नेता की विरोधी नहीं हैं। इसके विपरीत, कुलमन घीसिंग और बलेन शाह पर राजनीतिक विवाद की संभावना थी। अगर इनमें से किसी को प्रधानमंत्री बनाया जाता, तो विवाद बढ़ सकता था। इसलिए, सुशीला कार्की एक “बीच का रास्ता” साबित हुईं।

4. संवैधानिक संकट से बचाव

नेपाल के संविधान में अंतरिम प्रधानमंत्री के पद का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। ऐसे में, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व मुख्य न्यायाधीश को इस पद पर लाना संवैधानिक संकट को टालने का भी एक प्रयास माना जा रहा है।

संक्षेप में, अनुभव, राजनीतिक संतुलन और मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की वजह से सुशीला कार्की ने अंतरिम प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सभी को पीछे छोड़ दिया।