भाजपा समर्थक पर हमले में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की जमानत, कहा- यह लोकतंत्र पर हमला है
India News Live,Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसले में 2021 बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा के मामले में कुछ आरोपियों की जमानत रद्द कर दी। कोर्ट ने साफ कहा कि यह हमला एक राजनीतिक बदले की भावना से किया गया था, क्योंकि पीड़ित ने भाजपा का समर्थन किया था। चुनाव परिणामों के दिन उसके घर पर हमला हुआ और उसकी पत्नी के साथ भी अभद्रता की गई। सुप्रीम कोर्ट ने इसे लोकतंत्र की जड़ों पर गंभीर हमला बताया।
यह फैसला सीबीआई की उस अपील पर आया जिसमें कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा आरोपियों को दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने शेख जमीर, शेख नुराई और शेख अशरफ की जमानत रद्द करते हुए कहा कि इस मामले की गंभीरता अदालत की अंतरात्मा को झकझोरने वाली है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने टिप्पणी की कि आरोपियों ने जानबूझकर भीड़ इकट्ठा की, शिकायतकर्ता के घर पर हमला किया, सामान लूटा और डर का माहौल बनाया। कोर्ट ने कहा कि अगर इन्हें जमानत पर छोड़ा गया तो निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं होगी।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि आरोपी दो सप्ताह के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण करें और मुकदमे की सुनवाई छह महीने के भीतर पूरी की जाए। कोर्ट ने बंगाल के गृह सचिव और डीजीपी को शिकायतकर्ता और गवाहों को सुरक्षा देने का आदेश भी दिया।
यह घटना 2 मई 2021 को हुई थी, जब भाजपा के समर्थन के चलते एक गिरोह ने शिकायतकर्ता के घर बम फेंके और उसके परिवार पर हमला किया। उसकी पत्नी के साथ छेड़छाड़ की गई और जान बचाने के लिए उसने खुद पर केरोसिन डाल आत्मदाह की धमकी दी, तब जाकर आरोपी भागे।
शिकायत दर्ज कराने की कोशिश पर भी पुलिस ने उसका साथ नहीं दिया, बल्कि गांव छोड़ने की सलाह दी। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने मामले की जांच शुरू की और दिसंबर 2021 में एफआईआर दर्ज की गई। आरोपियों को नवंबर 2022 में गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल हुई।