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July 09 2026 12:12 am

डोनाल्ड ट्रंप के एक एलान से क्रैश हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स 1677 अंक टूटा; निवेशकों के डूबे ₹8.05 लाख करोड़

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भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में बुधवार, 8 जुलाई 2026 का दिन निवेशकों के लिए किसी बुरे सपने जैसा साबित हुआ। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अचानक भड़के नए भू-राजनीतिक (Geopolitical) संकट के चलते घरेलू शेयर बाजार ताश के पत्तों की तरह ढह गए। दलाल स्ट्रीट पर यह हाहाकार तब मचा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) समिट के दौरान एलान किया कि ईरान के साथ हुआ अंतरिम समझौता अब पूरी तरह "खत्म" हो चुका है। इस एक बयान के बाद बाजार में चौतरफा बिकवाली का ऐसा तूफान आया कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (BSE Sensex) 1,677.12 अंक यानी 2.15 फीसदी की ऐतिहासिक गिरावट के साथ 76,503.60 के स्तर पर बंद हुआ। दिन के कारोबार के दौरान बाजार में इतनी भयंकर अफरा-तफरी थी कि सेंसेक्स ऊपर-नीचे होते हुए 77,851.18 के उच्चतम और 76,259.03 के न्यूनतम स्तर पर आ गया।

सेंसेक्स की तरह ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला सूचकांक निफ्टी (NSE Nifty) भी 516.65 अंक या 2.12 फीसदी का गोता लगाकर 23,882.05 के स्तर पर बंद हुआ। दिग्गज शेयरों के साथ-साथ छोटे और मझोले शेयरों (ब्रॉडर मार्केट) में भी हाहाकार देखा गया; जहां बीएसई मिडकैप सेलेक्ट इंडेक्स 2.14 फीसदी टूटा, वहीं बीएसई स्मॉलकैप सेलेक्ट इंडेक्स भी 1.61 फीसदी की कमजोरी के साथ लाल निशान में बंद हुआ।

इंडिया VIX में 28% की तूफानी तेजी: निवेशकों में फैला भयंकर डर

वैश्विक और घरेलू बाजार में आई इस अचानक अनिश्चितता का सबसे सटीक असर भारत के वोलैटिलिटी इंडेक्स यानी 'इंडिया वीआईएक्स' (India VIX) पर देखने को मिला। बाजार में घबराहट को मापने वाला यह सूचकांक एक ही सत्र में 28 फीसदी से ज्यादा उछल गया। इंडिया वीआईएक्स में आई यह तूफानी तेजी इस बात का साफ संकेत है कि निवेशकों के बीच रिस्क से बचने और अपने पोर्टफोलियो को खाली करने की होड़ मच गई है।

इस महा-बिकवाली के चलते मात्र कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों की करीब 8.05 लाख करोड़ रुपये की विशालकाय संपत्ति समंदर में डूब गई। आंकड़ों के मुताबिक, बीएसई (BSE) में लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) जो पिछले दिन 7 जुलाई को 479.67 लाख करोड़ रुपये था, वह बुधवार को घटकर सीधे 471.62 लाख करोड़ रुपये रह गया।

एफएमसीजी और ऑटो सेक्टर्स को सबसे गहरी चोट: डाबर जैसे बड़े स्टॉक्स धराशायी

अगर सेक्टोरल परफॉर्मेंस की बात करें, तो बाजार के इस क्रैश में सबसे ज्यादा मार निफ्टी एफएमसीजी (Nifty FMCG) और निफ्टी ऑटो (Nifty Auto) सेक्टर्स पर पड़ी है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण कंज्यूमर गुड्स कंपनियों की इनपुट कॉस्ट बढ़ने के डर से निवेशकों ने इन सेक्टर्स से भारी मुनाफावसूली की, जिसके चलते डाबर (Dabar) जैसी दिग्गज कंपनी का शेयर 3.79 फीसदी तक टूट गया।

बाजार के इस रुख पर वित्तीय कंसल्टेंसी फर्म 'पॉकेटफुल' के फाउंडर सर्वम गोयल ने एक बेहद गंभीर विश्लेषण साझा किया है। सर्वम गोयल ने कहा, "बुधवार को बाजार में जो कुछ भी हुआ, वह कोई सामान्य करेक्शन या गिरावट नहीं थी। यह सीधे तौर पर मार्केट का रिवर्सल (रुख का पूरी तरह पलटना) था। पिछले दो महीनों से भारतीय बाजार जिन सकारात्मक ट्रिगर्स का जश्न मना रहा था—जैसे कि कच्चे तेल का सस्ता होना, वैश्विक तनाव में कमी आना और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें—वे सभी उम्मीदें और जश्न अमेरिकी राष्ट्रपति के केवल एक सत्र के बयानों से पूरी तरह खत्म हो गए।"

नाटो समिट से लेकर मिडल-ईस्ट के युद्ध तक: समझें पूरी क्रोनोलॉजी

सर्वम गोयल ने वैश्विक घटनाक्रम को समझाते हुए बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले अंकारा में नाटो समिट के दौरान अमेरिका-ईरान सीजफायर समझौते को रद्द करने का एलान किया। इसके तुरंत बाद अमेरिकी सेना ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सीरिया और इराक के पास मौजूद 80 से ज्यादा ईरानी सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले कर दिए। इस हमले के जवाब में ईरान की राजधानी तेहरान से तीखी प्रतिक्रिया आई और उन्होंने वैश्विक व्यापार के लिए सबसे लाइफलाइन माने जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों के अधिकार रद्द कर दिए और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस को उड़ाने की धमकी दे डाली। बदले में वॉशिंगटन ने ईरान के ऑयल एक्सपोर्ट (तेल निर्यात) के सभी बचे हुए लाइसेंस रद्द कर दिए।

इस सैन्य टकराव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट पर पड़ा, जहां ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें 6.18 फीसदी की आग उगलती तेजी के साथ 78.74 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।

डॉलर के मजबूत होने से रुपया 59 पैसे हुआ धड़ाम: कच्चे तेल ने बिगाड़ा गणित

पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति बनने और तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन बड़े मालवाहक जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद पूरी दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा पैदा हो गया है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित निवेश मानकर उसकी मांग तेजी से बढ़ गई है।

नतीजतन, भारतीय मुद्रा को भी इस संकट का सामना करना पड़ा और बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया (INR) 59 पैसे की भारी गिरावट के साथ 95.55 (प्रोविजनल) के अब तक के सबसे निचले स्तर पर बंद हुआ। इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाने वाला 'डॉलर इंडेक्स' (Dollar Index) भी 0.11 फीसदी की बढ़त के साथ 101.13 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जिसने भारतीय बाजार के सेंटीमेंट को पूरी तरह से डैमेज कर दिया।