Sensex Crash: शेयर बाजार में 'ब्लैक गुरुवार', सेंसेक्स 1236 अंक टूटा; युद्ध की आहट से निवेशकों के ₹7.55 लाख करोड़ स्वाहा

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India News Live,Digital Desk : भारतीय शेयर बाजार में पिछले तीन दिनों से जारी बढ़त पर गुरुवार को अचानक ब्रेक लग गया। मध्य पूर्व (Middle East) में गहराते भू-राजनीतिक संकट और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की बढ़ती आशंकाओं ने दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों को बुरी तरह डरा दिया है। गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को बाजार खुलते ही बिकवाली का ऐसा दौर चला कि देखते ही देखते बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 1,236 अंक गोता लगा गया। इस भीषण गिरावट ने निवेशकों की झोली से एक ही झटके में करीब 7.55 लाख करोड़ रुपये साफ कर दिए।

निफ्टी में भी मची खलबली, मार्केट कैप लुढ़का

सेंसेक्स के साथ-साथ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी भारी दबाव में नजर आया। कारोबार के दौरान निफ्टी एक समय 1,400 अंकों तक टूट गया था, हालांकि क्लोजिंग तक इसने कुछ रिकवरी की और अंततः 400 अंकों (1.41%) की गिरावट के साथ 25,454 पर बंद हुआ। इस गिरावट के बाद बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर अब 464 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

इन दिग्गज शेयरों ने डुबोई निवेशकों की लुटिया

बाजार में आई इस सुनामी का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर पर पड़ा।

टॉप लूजर्स: रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, एलएंडटी (L&T), हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी जैसे दिग्गज शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई।

आईटी सेक्टर ने संभाला मोर्चा: बाजार के इस गिरते माहौल में केवल आईटी (IT) सेक्टर ने थोड़ी हिम्मत दिखाई। इंफोसिस और टीसीएस के शेयरों में मामूली बढ़त दर्ज की गई, लेकिन यह पूरे बाजार को संभालने के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान रही।

क्यों मची बाजार में अफरा-तफरी?

गिरावट की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल टेंशन है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव की खबरों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं। जब भी युद्ध जैसे हालात बनते हैं, निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे निवेश से अपना पैसा निकालकर सोने (Gold) और सरकारी बॉन्ड जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर भागते हैं। इसी 'सेफ हेवन' की तलाश ने भारतीय बाजार पर भारी दबाव डाला।

एशियाई बाजारों और कच्चे तेल की स्थिति

हैरानी की बात यह रही कि जहां भारतीय बाजार लहूलुहान था, वहीं अन्य एशियाई बाजारों में रौनक रही। दक्षिण कोरिया का 'कोस्पी' 3% और जापान का 'निक्केई' 1% की बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। ब्रेंट क्रूड ऑयल 70.61 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक नकारात्मक संकेत है।