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September 28 2026 09:34 pm

ईरान तनाव के बीच UAE राष्ट्रपति संग 4 घंटे की सीक्रेट मीटिंग, 7 अक्टूबर की चेतावनी पर मची खलबली

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पश्चिम एशिया में ईरान के साथ जारी भीषण तनातनी और अमेरिकी कूटनीति के बनते-बिगड़ते समीकरणों के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बेहद गोपनीय और अप्रत्याशित कदम उठाया है। नेतन्याहू ने बिना किसी पूर्व आधिकारिक घोषणा के संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी का अचानक दौरा किया और वहां यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) के साथ गुप्त बैठक की। सूत्रों के अनुसार, एक निजी विमान से पहुंचे नेतन्याहू का यह सीक्रेट मिशन लगभग चार घंटे तक चला। इस अचानक हुई यात्रा ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों और खाड़ी देशों की राजनीति में भारी हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि यह बैठक ऐसे समय हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम अपने चरम पर हैं।

ईरान के साथ टकराव और खाड़ी का सुरक्षा घेरा

मध्य पूर्व में ईरान समर्थित गुटों के बढ़ते हमलों, लाल सागर में समुद्री सुरक्षा के संकट और सीधी सैन्य भिड़ंत की आशंकाओं के बीच इस मुलाकात को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। 2020 में ऐतिहासिक 'अब्राहम समझौते' (Abraham Accords) के तहत इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच राजनयिक रिश्ते स्थापित हुए थे, जिसके बाद से दोनों मुल्क रक्षा और खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान के मामले में करीब आए हैं। तेहरान की ओर से लगातार मिल रही धमकियों और अमेरिकी रुख में आ रहे बदलावों को देखते हुए इजरायल खाड़ी देशों के साथ अपनी सामरिक साझेदारी को मजबूत रखना चाहता है। माना जा रहा है कि इस गोपनीय वार्ता में फारस की खाड़ी की हिफाजत, संभावित ईरानी जवाबी कार्रवाई से निपटने के प्लान और क्षेत्रीय हवाई सुरक्षा तंत्र के समन्वय पर गहन मंथन हुआ है।

7 अक्टूबर की खुफिया चेतावनी और इजरायल का घरेलू भूचाल

इस औचक दौरे का दूसरा और सबसे विस्फोटक पहलू इजरायल की घरेलू राजनीति से जुड़ा हुआ है। हाल ही में इजरायली अखबार 'हारेत्ज' ने अपनी एक रिपोर्ट में यह सनसनीखेज दावा किया था कि 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले से करीब डेढ़ हफ्ते पहले यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद ने खुद नेतन्याहू को फोन कर चेतावनी दी थी कि हमास एक बड़े ऑपरेशन की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि नेतन्याहू ने इस चेतावनी को इजरायली सुरक्षा एजेंसियों या सेना तक नहीं पहुंचाया। नेतन्याहू ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए अखबार पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। कूटनीतिक सूत्रों का कहना है कि नेतन्याहू ने इस दौरे के दौरान यूएई नेतृत्व से उस विवादित रिपोर्ट का सार्वजनिक रूप से खंडन करने या स्थिति स्पष्ट करने का आग्रह किया है, ताकि आगामी इजरायली चुनावों में विपक्षी दलों द्वारा उन पर लगाए जा रहे सुरक्षा नाकामी के आरोपों की धार कुंद की जा सके।

यूएई का सधा हुआ कूटनीतिक रुख और भविष्य के मायने

इस मुलाकात पर न तो यरुशलम में प्रधानमंत्री कार्यालय और न ही यूएई के विदेश मंत्रालय ने कोई औपचारिक बयान जारी किया है। हालांकि, अबू धाबी की ओर से यह दोहराया गया है कि दोनों देशों के बीच औपचारिक समझौते के बाद से राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीति के लिए सीधे और खुले संचार चैनल लगातार सक्रिय हैं। इससे पहले भी मार्च के महीने में दोनों नेताओं की ओमान सीमा के पास अल-ऐन शहर में ऐसी ही एक गोपनीय मुलाकात की खबर सामने आई थी। यूएई एक तरफ इजरायल के साथ रणनीतिक स्थिरता बनाए रखना चाहता है, तो दूसरी तरफ वह ईरान के साथ किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध में सीधे तौर पर घसीटे जाने से भी बचना चाहता है। नेतन्याहू का यह संक्षिप्त अबू धाबी दौरा साबित करता है कि पश्चिम एशिया में पर्दे के पीछे बहुत बड़ा भू-राजनीतिक खेल चल रहा है, जिसके परिणाम आने वाले दिनों में पूरे क्षेत्र की सुरक्षा तस्वीर तय करेंगे।